Ramgarh दुर्गा पूजा 🥰🙏
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इसमें भैंसासुर और दुर्गा माँ की युद्ध चल रहा है ची के दुर्गा पूजा में महासप्तमी, महाअष्टमी और महानवमी के दौरान माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए पौराणिक युद्ध (संग्राम) का सजीव और रोमांचक वर्णन प्रस्तुत है:
रामगढ़ की दुर्गा पूजा: माँ दुर्गा और महिषासुर के महासंग्राम का जीवंत दृश्य
रामगढ़ की पावन भूमि पर जब दुर्गा पूजा का उत्सव अपनी चरम सीमा पर होता है, तो पूरा शहर रोशनी, आस्था और उमंग से जगमगा उठता है। पाण्डालों में गूंजते ढूढ़-बाजे, ढाक की थाप और मंत्रोच्चार के बीच जब भक्तों की नजरें माता के दरबार पर पड़ती हैं, तो उनका दिल श्रद्धा और रोमांच से भर जाता है। हर पाण्डाल में महिषासुर मर्दिनी के रूप में माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित होती है, जो उस पौराणिक और भीषण युद्ध की गाथा कहती है जिसने ब्रह्मांड को असुरों के अत्याचार से मुक्त कराया था।
युद्ध की पृष्ठभूमि और भयानक गड़गड़ाहट
कथा के अनुसार, जब महिषासुर के आतंक से तीनों लोक कांप उठे और देवताओं की शक्ति भी कम पड़ने लगी, तब समस्त देवताओं के तेज से आदि शक्ति माँ दुर्गा प्रकट हुईं। राँची के भव्य पाण्डालों में इस दृश्य को कलात्मक रूप से उकेरा जाता है। जब महाअष्टमी की संध्या पर विशेष पूजा और महाआरती होती है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे पाण्डाल का पूरा वातावरण उस महायुद्ध के रणक्षेत्र में बदल गया हो।
शस्त्रों की खनक और महिषासुर का अहंकार
महिषासुर, जो अपनी माया और बल के अहंकार में चूर था, उसने अपनी विशाल सेना के साथ माँ दुर्गा पर आक्रमण किया। युद्ध भूमि में चारित्रिक असुरों की हुंकार और हाथियों-घोड़ों की टापों से धरती डोलने लगी।
माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल, चक्र, गदा और धनुष से असुर सेना के हर वार को पल भर में नेस्तनाबूद कर दिया।
एक ओर महिषासुर अपनी इच्छा से रूप बदलकर कभी भैंसे का रूप धरता, तो कभी शेर या सिंह बनकर माँ को भ्रमित करने की कोशिश करता।
विजय और धर्म की स्थापना
लेकिन त्रिलोकी की संरक्षिका माँ जगदम्बा के आगे उस महाबली असुर की एक न चली। माँ के सिंह की दहाड़ और माँ के अस्त्रों के प्रहार से असुर सेना में भगदड़ मच गई। अंततः, महाकाली का रूप धारण कर माँ दुर्गा ने अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर दिया।
रामगढ के पाण्डालों में इस युद्ध की कलाकृतियाँ देखकर हर भक्त के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह दृश्य सिर्फ दो शक्तियों का टकराव नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की eternal (शाश्वत) विजय का प्रतीक है। रामगढ़ की यह पूजा हमें यह संदेश देती है कि अहंकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंततः शक्ति और न्याय के आगे उसे झुकना ही पड़ता है।