कज्जलम् संस्कृतगीतम् # Kajjalam Sanskrit Song # तवाक्ष्णोरिदं कज्जलं, मां करोति तन्वि ! विद्धम्
JM SHASTRI BIRLA
0:00 / 0:00
कज्जलम् संस्कृतगीतम् # Kajjalam Sanskrit Song # तवाक्ष्णोरिदं कज्जलं, मां करोति तन्वि ! विद्धम्
2 355 просмотров · 1 г. назад
JM SHASTRI BIRLA
10,6 тыс. подписчиков
2 355 просмотров · 1 г. назад
तवाक्ष्णोरिदं कज्जलं, मां करोति तन्वि ! विद्धम् ।
मां पलं पलं प्रतिपलं स्मरणं ते सदायाति रे!
#jm_shastri_birla
#KAJJALAM_SANSKRIT_SONG
#SCHOOLSONGS
#ramya_ramya_sanskrit_bhasha
#कज्जलम्
#संस्कृतगीतम्
#kajjalam
#sanskritdancesong
#Teri_Ankhya_ka_Kajal_Sanskrit_version
#Haryanvi_dance
#शृङ्गाररसगीतानि
#तव_नेत्रयो_कज्जलम्
#Sanskrit_ka_janm
SANSKRIT SONGS PLAYLIST LINK :-
• संस्कृत के गाने व समाचार
हिंदी व हरियाणवी भक्ति के भजन:-
• Hindi / Haryanvi Bhakti Songs
EDUCATIONAL UPDATES LINK :-
• School level exams
NEW PENSION SCHEME UPDATES :-
• NEW PENSION SCHEME
Bhakti Songs:-
• Плейлист
Facebook page link :-
/ jm-shastri-birla-संस्कृत-106850172079371
तवाक्ष्णोरिदं कज्जलं, मां करोति तन्वि ! विद्धम् ।
शनैश्शनैस्त्वं चल हे! स्पंदयते हृन्मे नूपुरम्
मां पलं पलं प्रतिपलं स्मरणं ते सदायाति रे!
दहति मे हृदयं रूपं कान्तं ते ।।
1.
स्वप्नेषूत्थाय त्वां पश्यामि नित्यम्
प्राणेभ्योऽपि प्राणप्रिये! त्वयि प्रीणाम्यहम्
मम जीवने आगत्य त्वया हृत्सौख्यं चोरितं
त्वं संगमरमरस्य मूर्ति: विलोक्य त्वां मनो लुब्धम्
2.
सरित्समयोस्तव नेत्रयोर्निलीये
मेघघटा खलु केशास्ते अत्राहं शये
इदं वीरदहियास्वप्नं तव वर कदाहं भवेयम्
नेदानीं बुभुक्षापिपासे स्वीकरोतु मां हि स्वीयम्
तवाक्ष्णोरिदं कज्जलम्
This lampblack, this attractive blackness in your eyes,
O fair lady! is hurting me, is injuring me, is in fact tickling me.
Move slowly as your quick steps.
Your anklet makes my heart pound
Every moment, every second, I remember you.
Your flawless beauty ignites a fire in my heart.
1.
Even after waking from sleep in my dreams,
I only see you,
O my beloved!
More than my own life.I love you
Coming into my life,
You have stolen the peace of my heart.
You are a statue of marble, and seeing you makes my heart yearn.
2.
I wish I could get lost in your eyes, as deep as a lake, and sleep within them, like the clouds of your hair.
This is Veer Dahiya's dream: when will I become your husband? Now I don't feel hunger or thirst; just make me your own.
हे गोरी ! तेरी आंखों का यह काजल, मुझे घायल करता है।
तुम धीरे-धीरे चलो अर्थात् कदम रखो,
तुम्हारी पायल मेरा दिल धड़काती है।
मुझे पल पल प्रति पल तुम्हारी याद आती है
तुम्हारा बिना व्रण (खरोंच) वाला रूप मेरे हृदय में आग जलाता है।
मैं सपनों में नींद से जाग कर तुम्हें ही देखता हूं,
हे प्राण प्रिये! तुझे प्राणों से भी ज्यादा प्यार करता हूं ।
तूने मेरे जीवन में आकर मेरे हृदय का सुख (दिल का चैन) चुरा लिया है।
तू संगमरमर की मूर्ति है तुझे देखकर मेरा मंन ललचाता है
झील सी गहरी तुम्हारी आंखों में खो जाऊं
तेरे बाल बादलों की घटा जैसे हैं
मन करता है इनमें सो जाऊं
वीर दहिया (लेखक) का यह सपना है कि मैं तुम्हारा पति कब बनूंगा ?
अब मुझे भूख प्यास भी नहीं लगती,मुझे अपना बना लो