मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक -५ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी
Shree Chaitanya Ram
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मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक -५ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी
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मना पापसंकल्प सोडोनि द्यावा।
मना सत्यसंकल्प जीवीं धरावा॥
मना कल्पना ते नको विषयांची।
विकारे घडे हो जनी सर्व छी छी॥५॥