Ganesh Utsav katha Part 3🙏🙏 ( भगवान श्री गणेश की जन्मोत्सव कथा भाग 3)
Suman bairwa
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Ganesh Utsav katha Part 3🙏🙏 ( भगवान श्री गणेश की जन्मोत्सव कथा भाग 3)
श्री गणेश जन्म की पौराणिक कथा (Ganesh Janmotsav Katha)पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। स्नान करने से पहले उन्होंने अपने शरीर के मैल (उबटन) से एक सुंदर और बलवान बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण फूंक दिए। माता पार्वती ने उस बालक का नाम गणेश रखा।माता पार्वती ने गणेश जी को पहरे पर बिठा दिया और आदेश दिया कि— "पुत्र! मैं स्नान करने जा रही हूँ, तुम अंदर किसी को भी प्रवेश न करने देना। जब तक मैं बाहर न आऊँ, पहरा दो."\n\n### शिव-गणेश युद्ध और मस्तक काकटनाथोड़ी देर बाद वहां भगवान शिव आए और माता पार्वती के कक्ष में जाने लगे। बालक गणेश ने माता की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को द्वार पर ही रोक लिया। भगवान शिव ने समझाया कि वह इस देवी (पार्वती) के पति हैं, परंतु बालक गणेश अपनी माता के वचनों पर अडिग रहे और शिव जी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी।इसे भगवान शिव का अपमान समझकर उनके गणों और गणेश जी के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में क्रोधित होकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक गणेश का सिर उनके धड़ से अलग कर दिया।गजमुख (हाथी का मस्तक) की प्राप्तिजब माता पार्वती स्नान के बाद बाहर आईं और अपने पुत्र को मृत देखा, तो वे अत्यंत क्रोधित और विलाप करने लगीं। उनका ऐसा रूप देखकर पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया। माता पार्वती को शांत करने के लिए भगवान शिव ने सभी देवताओं को उत्तर दिशा में भेजकर किसी ऐसे जीव का सिर लाने को कहा जिसकी माता अपने बच्चे की तरफ पीठ करके सोई हो।देवताओं को एक हथिनी का बच्चा (गजबालाक) मिला, जिसका सिर वे ले आए। भगवान शिव ने वह गज-मस्तक बालक के धड़ पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया।प्रथम पूज्य का वरदानपुत्र को जीवित पाकर माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुईं। सभी देवताओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के इस पुत्र को आशीर्वाद दिया कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा या अनुष्ठान की शुरुआत में सबसे पहले श्री गणेश की ही पूजा की जाएगी। इसी कारण उन्हें 'प्रथम पूज्य' और 'विघ्नहर्ता' कहा गया।