डॉ. आंबेडकर की अपनी आत्मकथा: वेटिंग फ़ॉर अ वीज़ा | अपने ही देश में परदेसी | Hindi Documentary
Inspirational Thoughts
0:00 / 0:00
डॉ. आंबेडकर की अपनी आत्मकथा: वेटिंग फ़ॉर अ वीज़ा | अपने ही देश में परदेसी | Hindi Documentary
90 просмотров · 7 дней назад
Inspirational Thoughts
119 подписчиков
90 просмотров · 7 дней назад
क़रीब 1935 में डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर ने अपने हाथ से कुछ पन्ने लिखे। छपने के लिए नहीं — ये उनके निजी काग़ज़ों में मिले, और बाद में "Waiting for a Visa" नाम से प्रकाशित हुए।
इनमें छह घटनाएँ हैं, 1901 से 1938 तक। एक बच्चा जो मसूर स्टेशन पर उतरता है और जिसे लेने कोई नहीं आता। एक स्कूल का नल, जिसे छूने की इजाज़त नहीं। विदेश से लौटा एक विद्वान, जिसे रहने की जगह के लिए झूठा नाम लिखवाना पड़ता है। एक ताँगा, जिसे चलाने को कोई तैयार नहीं। दौलताबाद क़िले का पानी। एक डॉक्टर जो आने से मुकर जाता है। और बोरसद का वो नौजवान तलाटी, जो घिर जाने पर अपनी मौत की चिट्ठी ख़ुद लिखता है।
आंबेडकर ने ये सब किसी दलील के तौर पर नहीं लिखा। सिर्फ़ यह दर्ज करने के लिए कि हुआ क्या था।
इस वीडियो में जो भी तर्क, राय और निष्कर्ष हैं, वे डॉ. आंबेडकर के अपने हैं — चैनल के नहीं।
⏱️ अध्याय
00:00 अपने ही देश में वीज़ा
01:17 1901: मसूर स्टेशन पर वो बच्चा
05:18 स्कूल का वो नल
06:11 बड़ौदा: पारसी सराय और झूठा नाम
08:47 सराय से बाहर — कमाठी बाग के पाँच घंटे
10:34 1929: चालीसगाँव का ताँगा
12:01 1934: दौलताबाद क़िले का पानी
13:03 काठियावाड़: डॉक्टर और थर्मामीटर
14:49 1938: बोरसद का तलाटी
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
📚 स्रोत
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
Dr. Babasaheb Ambedkar: Writings and Speeches, Volume 12
"Waiting for a Visa" — printed pages 661–691
प्रकाशक: डॉ. अंबेडकर फ़ाउंडेशन, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार
मूल अंग्रेज़ी पाठ से। स्रोत में कुछ भी बदला या जोड़ा नहीं गया है।
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
अगर आपको लगता है कि इस वीडियो में कोई तथ्य ग़लत है, तो स्रोत के साथ कमेंट कीजिए। सुधार पिन किया जाएगा।
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━
#Ambedkar #WaitingForAVisa #Untouchability