मंगलमय निर्वाण की बेला | श्रद्धेय ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | MangalMay Nirvaan ki bela
Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
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मंगलमय निर्वाण की बेला | श्रद्धेय ब्र. रवींद्र जी ‘आत्मन्’ | MangalMay Nirvaan ki bela
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Baal Br. Pt. Sumat Prakash Ji
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मंगलमय निर्वाण की बेला
मंगलमय निर्वाण की बेला, छाया हर्ष महान रे।
जयवन्तो भगवान आत्मा, जयवन्तो भगवान रे ।। टेक।।
अशरीरी प्रभु ज्ञान शरीरी, जय-जय ज्ञानानंदमय,
सकल कर्ममल शून्य महेश्वर हुए सु परमानंदमय।
जगत विभव से रहित विभवमय पाया अविचल थान रे ।।1।।
लोक शिखर पर जाय विराजे, जगत पूज्य होकर स्वामी,
शुद्धातम सर्वोत्कृष्ट है सिद्ध हुआ त्रिभुवन नामी।
ध्रुव मंगल भगवान आत्मा, हुआ सहज श्रद्धान रे ।।2।।
अहो! आपके हो अनुगामी, निज आतम आराधें हम,
बाह्य विभव को धूल समझकर अपरिग्रह व्रत धारें हम।
निजानंद में तृप्त रहें प्रभु प्रगटे निश्चल ध्यान रे ।।3।।
असत् विभाव सहज नाशेंगे, सकल कर्म विनशायेंगे,
आप सरीखे गुण अनंत प्रभु, परिणति में विलसायेंगे।
आवागमन मिटेगा निश्चय, पावें पद निर्वाण रे ।।4।।
• श्रद्धेय ब्र. रवीन्द्रजी 'आत्मन्'
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Lyrics - Baal Br. Shree Ravindra Ji 'Aatman'
Singer - Swayam Jain, Sihor Bhopal
Studio - Vilas Digital Recording Studio, Rajnandgaon