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HIMALAYAN HIGHWAYS| Beautiful Hill Village Rains| रैंस-चोपता | UTTARAKHAND| CHAMOLI| NARAYANBAGAR|

Himalayan Highways

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HIMALAYAN HIGHWAYS| Beautiful Hill Village Rains| रैंस-चोपता | UTTARAKHAND| CHAMOLI| NARAYANBAGAR|

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नमस्कार हिमालयन हाइवेज के एक और एपिसोड में आपका स्वागत है। स्वर्ग से सुंदर उत्तराखण्ड की जीवनशैली से जुड़े इस एपिसोड में आज हम पहुंचे है चमोली जनपद के नारायणबगड़ विकासखण्ड स्थित मध्य कडाकोट पट्टी में। खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित इस क्षेत्र में प्रकृति के हर रंग बिखरे हुए है। कडाकोट पट्टी के गांवों में हिमालय की जीवनशैली के पारंपरिक रंग और उत्सवों का उल्लास हर वक्त नजर आता है। रीति-रिवाजों के साथ आधुनिकता को लेकर आगे बढ़ रहें इस क्षेत्र में ग्रामीण जीवनशैली आज भी लोकसंस्कृति को गौरवान्वित कर जाती है। आज के एपिसोड में हम आपके लिए लेकर आये है मध्य कडाकोट के गांव रैंस का अतीत से वर्तमान का सफर.. उत्तराखण्ड के कई क्षेत्रों में गांवों के समूहों के नाम से क्षेत्र की पहचान का तरीका प्राचीन है। ऐसे ही चमोली जनपद के नारायणबगड़ विकासखण्ड स्थित गांवों में शामिल है रैंस-चोपता । आबादी के लिहाज से ज्यादा जनसंख्या वाले इन गांवों को मध्य कडाकोट का केंद्र बिंदु भी कह सकते है। आज हम आपको रूबरू करवाने जा रहें है रैंस गांव से। नारायणबगड़ से परखाल रोड पर आगे बढ़ते हुए सड़क मार्ग के जरिये रैंस गांव तक पहुंचा जा सकता है। रामेश्वर महादेव और नागणी माता के आशीष वाले इस गांव में सैन्य परम्परा का बड़ा इतिहास रहा है। कृषि और पशुपालन यहां स्थानीय निवासियों की आय का सबसे बड़ा साधन रहा है और आज भी स्थानीय ग्रामीण इन माध्यमों को बखूबी आगे बढ़ा रहें है। रैंस गांव की जीवनशैली से पहले जानते है इस गांव का इतिहास और रैंस नाम रखे जाने के पीछे की कहानी, सादगी और मेहनत पहाड़ी गांवों की जीवनशैली का अहम हिस्सा हमेशा से रहा है और रैंस गांव में भी यही तस्वीर नजर आती है। पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में जीवन शुरू करने वाले इस गांव के युवाओं ने अपनी बहादुरी से गांव को गौरवान्वित किया है। प्रथम विश्व युद्ध के वक्त इस गांव से 11 युवा सेना में भर्ती हुए थे जिनके सम्मान में अंग्रेज सरकार द्वारा दिया गया शिलापट्ट आज भी मौजूद है। युवाओं की बहादुरी से गौरवान्वित रैंस गांव में बहादुर सैनिकों का इतिहास रहा हो लेकिन शिलापट्ट की स्थिति को देखकर अफसोस भी होता है।प्रकृति के बेहद करीब रैंस गांव में नागणी माता और रामेश्वर महादेव शिव मंदिर स्थित है। शिव मंदिर का इतिहास प्राचीन है और स्थानीय लोगों की अटूट श्रद्धा हमेशा से अपने इष्टदेवों पर रही है। नागणी माता का पवित्र मन्दिर होने के चलते गांव में कई रीति-रिवाज भी है। ग्रामीणों को इष्टदेवी राज राजेश्वरी गिरिजा भवानी का भी आशीष हरसमय मिलता है जिनका भव्य मंदिर चोपता गांव में स्थित है। रैंस गांव में पहाड़ी जीवनशैली के हर वो रंग नजर आते है जो पहाड़ों की सँस्कृति का हिस्सा रहें है। गांव में आधुनिकता के साथ शहरों की तरफ पलायन भी हुआ है लेकिन सावर्जनिक और निजी कार्यक्रमों में ग्रामीणों की भागीदारी हमेशा रहती है। बुनियादी सुविधाओं का अभाव हमेशा से पहाड़ों की जीवनशैली को और मुश्किल बनाता रहा है और रैंस गांव भी इससे अछूता नजर नही आता।सड़क मार्ग से जुड़ने के बाद रैंस गांव में भी बदलाव नजर आता है। दैनिक जरूरत की वस्तुओं की आपूर्ति से लेकर मुख्य बाजारों तक पहुंच आसान होने से लोगों को राहत मिली है वहीं कृषि से जुड़े लोगों को अपना उत्पाद बाजार तक पहुंचाना आसान हुआ है। बुनियादी सुविधाओं को लेकर अभी भी दिक्कतें नजर आती है लेकिन लोगों को उम्मीद है कि देर सवेर शायद उसका भी समाधान हो जाय। रैंस गांव के सफर में आज इतना ही अगले एपिसोड में आप देखेंगे रैंस से लगे चोपता गांव की पारम्परिक उल्लास से भरपूर जीवनशैली और इतिहास। उत्तराखण्ड के गांवो से जुड़ी जानकारियों के लिए कृपया चैनल को सब्सक्राइब अवश्य करें साथ ही अपने सुझाव हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य प्रेषित करें। हिमालयन हाइवेज | उत्तराखंड | चमोली | थराली | नारायणबगड़ | रैंस चोपता | खूबसूरत पहाड़ी गाँव | रामेश्वर शिव मंदिर | नागणी माता मंदिर | उत्तराखंड के गाँव | हिमालयी गाँवों जीवन | लोकसंस्कृति | चमोली के गाँव | थराली तहशील |