Panchami Gati Pamu । પંચમી ગતિ પામું.....
Jain Stavan Dhara
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Panchami Gati Pamu । પંચમી ગતિ પામું.....
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Jain Stavan Dhara
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प्रणाम
जय जिनेंद्र
परम पावन एवं अनंत उपकारी वीतराग देव अरिहंत प्रभु के चरणों में कोटि-कोटि वंदन।
जिनशासन की पावन परम्परा और संयम पथ को आलोकित करने वाले पूज्य आचार्य भगवंत, पूज्य उपाध्याय भगवंत एवं सर्व साधु भगवंतों को भाववंदना।
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आशीर्वाद दाता
भक्तियोगाचार्य प.पू.आ.भ. श्री यशोविजयसूरीश्वरजी म.सा.
शास्त्र संशोधक प.पू.आ.भ. श्री मुनिचंद्रसूरीश्वरजी म.सा.
मार्गदर्शक
प.पू. पंन्यास प्रवर श्री दिव्यरत्न विजयजी म.सा
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जिनके उपकारों का ऋण अनंत जन्मो में भी नहीं चुकाया जा सकता ऐसे परम उपकारी माता पिता
श्रीमती भँवरीदेवी एवं श्री मुल्तानमलजी दाँतेवाडिया के चरणों में वंदन
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गीत - पंचमी गति पामु
गीतकार - विनोद जैन