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मेरे दुश्मन जितना ज़्यादा अपनी दौलत दिखाते हैं, मैं उतना ही अमीर होता जाता हूँ।

नाटक क्षण

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मेरे दुश्मन जितना ज़्यादा अपनी दौलत दिखाते हैं, मैं उतना ही अमीर होता जाता हूँ।

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नाटक क्षण
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दस साल बाद ली हेंग अपने पुराने सहपाठियों की पार्टी में लौटता है। कभी वह चुपचाप लिंग चुचु को पसंद करता था, लेकिन अब सबको लगता है कि वह उसके लायक नहीं है। सहपाठी अपनी नौकरी, दौलत और रिश्तों का घमंड करते हुए उसका मज़ाक उड़ाते हैं। तभी ली हेंग के दिमाग में एक रहस्यमय सिस्टम सक्रिय हो जाता है—जो भी उसके सामने डींग मारता है, उसकी बात ली हेंग के लिए सच बन जाती है। कुछ ही पलों में उसे बड़ी कंपनी के शेयर, आलीशान घर, लग्ज़री कार और मशहूर होटलों व क्लबों का मालिकाना हक मिलने लगता है। फिर वही लोग, जो उसे गरीब और नाकाम समझते थे, उसके सामने हैरान रह जाते हैं। लिंग चुचु अब भी उसके करीब है, लेकिन उसके परिवार और आने वाली शादी का दबाव दोनों के बीच नई मुश्किलें खड़ी कर देता है। ली हेंग अपनी असली ताकत कब और कैसे सामने लाएगा?