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प्रथम यथामति प्रणऊँ, श्रीवृन्दावन अति रम्य | श्री हित चौरासी पद 57 | श्री हित हरिवंश | राधावल्लभ भजन

Sanatan Vaani By Harshit

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प्रथम यथामति प्रणऊँ, श्रीवृन्दावन अति रम्य | श्री हित चौरासी पद 57 | श्री हित हरिवंश | राधावल्लभ भजन

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🌸 *श्री हित चौरासी — पद 57* 🌸 *“प्रथम यथामति प्रणऊँ, श्रीवृन्दावन अति रम्य ।”* श्री हित चौरासी का यह विस्तृत और भावपूर्ण ब्रज पद *श्रीवृन्दावन की रमणीयता, श्रीराधिका की कृपा, यमुना, पुष्पों की सुगंध, कोयल की कूक, नृत्य करते मयूर, नवल निकुंज, श्यामा-श्याम किशोर की मधुर लीलाओं और ब्रज की होरी* के सुंदर भावों को सामने रखता है। पद में वृन्दावन के प्राकृतिक सौंदर्य का अत्यंत मनोहर चित्र दिखाई देता है—यमुना जल, ऋतुओं की मधुरता, नवीन पल्लव, सुगंधित पुष्प, शीतल-मंद पवन और नवल निकुंज के सुंदर वातावरण के साथ श्यामा-श्याम की प्रेममयी लीलाएँ वर्णित हैं। आगे पद में *होरी, संगीत, बाँसुरी, मृदंग, पिचकारी, कुमकुम और हिंडोल* जैसे सुंदर ब्रज-लीला प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन मिलता है। अंत में *हित हरिवंश* के माध्यम से श्यामा-श्याम के अचल बिहार की मंगल भावना प्रकट होती है। यह प्रस्तुति *श्री हित हरिवंश महाप्रभु जी, श्री राधा, श्री कृष्ण, श्री राधावल्लभ लाल जी, वृन्दावन और राधावल्लभ सम्प्रदाय* के भक्तिमय भावों को समर्पित है। 🙏 यदि आपको यह पद पसंद आए तो वीडियो को Like करें, Share करें और *Sanatan Vaani By Harshit Ojha* को Subscribe करें। 🌺 *श्री राधे नाम का स्मरण करते रहें।* ━━━━━━━━━━━━━━━━━━ 📜 श्री हित चौरासी — पद 57 प्रथम यथामति प्रणऊँ, श्रीवृन्दावन अति रम्य । श्रीराधिका कृपा बिनु, सबके मनन अगम्य ॥ वर यमुनाजल सींचन, दिनहीं शरद-बसंत । विविध भाँति सुमनस के, सौरभ अलि-कुल मंत ॥ अरुण नूत पल्लव पर, कूजत कोकिल कीर । निर्तन करत सिखीकुल, अति आनन्द अधीर ॥ बहत पवन रुचिदायक, शीतल-मंद-सुगंधु । अरुण, नील, सित मुकुलित, जहाँ तहाँ पूषण-बंधु ॥ अति कमनीय विराजत, मन्दिर नवल निकुंज । सेवत सगन प्रीतिजुत, दिन मीनध्वज-पुंज ॥ रसिक-रासि जहाँ खेलत, श्यामा-श्याम किशोर । उभय-बाहु-परिरंजित, उठे उनींदे भोर ॥ कनक कपिस पट शोभित, सुभग साँवरे अंग । नील वसन कामिनि उर, कंचुकी कसूँभी सुरंग ॥ ताल रबाब मुरज डफ, बाजत मधुर मृदंग । सरस उकति-गति सूचत, वर बाँसुरी मुख चंग ॥ दोऊ मिलि चाँचर गावत, गौरी राग अलाप । मानस मृग बल बेधत, भ्रकुटि धनुष दृग चाँप ॥ दोऊ कर तारिनु पटकत, लटकत इत उत जात । हो-हो-होरी बोलत, अति आनँद कुलकात ॥ रसिक लाल पर मेलत, कामिनि बंदनधूरि । पिय पिचकारिनु छिरकत, तकि-तकि कुमकुम पूरि ॥ कबहुँ-कबहुँ चन्दन तरु, निर्मित तरल हिंडोल । चढ़ि दोऊ जन झूलत, फूलत करत कलोल ॥ वर हिंडोल झकोरन, कामिनि अधिक डरात । पुलकि-पुलकि वेपथ अँग, प्रीतम उर लपटात ॥ हित चिंतक निज-चेरिनु, उर आनन्द न समात । निरखि निपट नैनन सुख, तृण तोरत बलि जात ॥ अति उदार विवि सुन्दर, सुरत सूर सुकुमार । (जै श्री) हित हरिवंश करौ दिन, दोऊ अचल बिहार ॥ *॥ जय श्री हित हरिवंश ॥* Shri Hit Chaurasi, Shri Hit Chaurasi Pad 57, Pratham Yathamati Pranaun, Shri Vrindavan Ati Ramya, Pratham Yathamati Pranaun Pad, Shri Hit Harivansh, Shri Hit Harivansh Mahaprabhu, Hit Harivansh Pad, Radha Vallabh Bhajan, Radha Vallabh Sampraday, Braj Bhajan, Braj Bhasha Bhajan, Vrindavan Bhajan, Vrindavan Pad, Radha Krishna Bhajan, Shri Radha Bhajan, Nikunj Leela, Vrindavan Nikunj, Shri Radhavallabh Lal, Shyama Shyam, Braj Ras, Braj Holi Bhajan, Hindola Leela, Radha Vallabh Pad #श्रीहितचौरासी #श्रीहितचौरासीपद #प्रथमयथामतिप्रणऊँ #श्रीवृन्दावन #श्रीहितहरिवंश #राधावल्लभ #राधावल्लभसम्प्रदाय #ब्रजभजन #ब्रजपद #वृन्दावन #राधाकृष्ण #श्रीराधा #निकुंजलीला #श्यामाश्याम #ब्रजहोरी #हिंडोललीला #ShriHitChaurasi #ShriHitHarivansh #RadhaVallabh #RadhaVallabhBhajan #BrajBhajan #Vrindavan #RadhaKrishna #brajbhasha Pratham Yathamati Pranaun, Shri Vrindavan Ati Ramya । Shri Radhika Kripa Binu, Sabke Manan Agamya ॥ Var Yamunajal Sinchan, Dinhin Sharad-Basant । Vividha Bhanti Sumanas Ke, Saurabh Ali-Kul Mant ॥ Arun Nut Pallav Par, Kujat Kokil Keer । Nirtan Karat Sikhikul, Ati Anand Adheer ॥ Bahat Pavan Ruchidayak, Sheetal-Mand-Sugandhu । Arun, Neel, Sit Mukulit, Jahan Tahan Pooshan-Bandhu ॥ Ati Kamneey Virajat, Mandir Naval Nikunj । Sevat Sagan Preetijut, Din Meendhwaj-Punj ॥ Rasik-Rasi Jahan Khelat, Shyama-Shyam Kishor । Ubhay-Bahu-Pariranjit, Uthe Uneende Bhor ॥ Kanak Kapis Pat Shobhit, Subhag Sanwre Ang । Neel Vasan Kamini Ur, Kanchuki Kasunbhi Surang ॥ Taal Rabab Muraj Daf, Baajat Madhur Mridang । Saras Ukati-Gati Soochat, Var Bansuri Mukh Chang ॥ 🕉️ *सनातन वाणी* में आपका हार्दिक स्वागत है। 🙏 यह चैनल सनातन धर्म एवं वैष्णव परंपरा को समर्पित है। यहाँ आपको नियमित रूप से— 🌸 श्री हरिवंश महाप्रभु जी की वाणी, स्तुति एवं पद 🌸 श्री राधावल्लभ सम्प्रदाय के दिव्य पद, भजन एवं कीर्तन 🌸 गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के भजन, संकीर्तन एवं आध्यात्मिक संगीत 🌸 रामानुज सम्प्रदाय की स्तुतियाँ एवं दिव्य रचनाएँ 🌸 श्री राधा-कृष्ण, श्रीराम, हनुमान जी एवं महादेव के भजन, आरती, मंत्र एवं स्तोत्र 🌸 नवीन भक्ति गीत, कीर्तन, आध्यात्मिक संगीत एवं प्रेरणादायक वीडियो यदि आप सनातन संस्कृति, वैष्णव परंपरा और दिव्य भक्ति से जुड़ना चाहते हैं, तो हमारे चैनल को *Subscribe* करें और 🔔 *Bell Icon* अवश्य दबाएँ। 📧 *Business Enquiries:* [iamharshitojha@gmail.com](mailto:iamharshitojha@gmail.com) 📸 *Instagram:*   / vedicpathshala2026   📘 *Facebook:*   / 1d7ntenoek   🙏 श्री राधे 🙏 जय श्री राधावल्लभ लाल 🙏 जय श्रीकृष्ण 🙏 जय श्रीराम 🙏 हर हर महादेव