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#जो नहीं है:वही#आशापूर्णा देवी की कहानी/पति पत्नी के संबध पर एक कहानी.....

Hindi Sahitya:SeemaSingh

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#जो नहीं है:वही#आशापूर्णा देवी की कहानी/पति पत्नी के संबध पर एक कहानी.....

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आशापूर्णा देवी एक प्रसिद्ध बंगाली कवयित्री और उपन्यासकार थीं। इनका परिवार एक मध्यमवर्गीय परिवार था। इनके पिता एक अच्छे चित्रकार थे और इनकी माता की बांग्ला साहित्य में गहरी रुचि थी। पिता की चित्रकारी में रुचि और माँ के साहित्य प्रेम की वजह से आशापूर्णा देवी को उस समय के जाने-माने साहित्यकारों और कला शिल्पियों से निकट परिचय का अवसर मिला। उनकी प्रमुख रचनाएँ निम्न है जैसे; स्वर्णलता, प्रथम प्रतिश्रुति, प्रेम और प्रयोजन, बकुलकथा, गाछे पाता नील, जल, आगुन आदि। उन्हें 1976 में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार प्राप्त करने वाली वे पहली महिला हैं। आशापूर्णा देवी (8 जनवरी 1909-13 जुलाई 1995) भारत से बांग्ला भाषा की कवयित्री और उपन्यासकार थीं, जिन्होंने 13 वर्ष की अवस्था से लेखन प्रारम्भ किया और आजीवन साहित्य रचना से जुड़ीं रहीं। 1976 में बंगाली उपन्यासकार, आशापूर्णा देवी, ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनीं। उन्होंने वर्ष 1964 में प्रकाशित अपने उपन्यास "प्रथम प्रतिश्रुति " के लिए पुरस्कार जीता।