हनुमान अहिरावण वध स्तोत्र | मूल रचना | दिव्य विजय गाथा
Maa ki Ditya
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हनुमान अहिरावण वध स्तोत्र | मूल रचना | दिव्य विजय गाथा
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जय बजरंगबली 🙏
यह एक मौलिक रचना है (Original Composition) — हनुमान जी द्वारा अहिरावण के वध और भगवान श्रीराम-लक्ष्मण की पाताल लोक से रक्षा की कथा को समर्पित। यह कोई प्राचीन या पारंपरिक स्तोत्र नहीं है, बल्कि "अयि गिरिनन्दिनि" स्तोत्र की शैली में रची गई एक नई भक्ति रचना है।
📖 कथा सार:
शिविर में विश्राम कर रहे श्रीराम-लक्ष्मण की रक्षा करते हुए हनुमान जी की चौकसी के बावजूद, मायावी अहिरावण छल से विभीषण का रूप धारण कर दोनों भाइयों को मूर्छित कर पाताल लोक ले जाता है। जागते ही हनुमान जी वायुवेग से पाताल की ओर प्रस्थान करते हैं, अपने ही पुत्र मकरध्वज से द्वार पर भेंट करते हैं, पाताल देवी से अहिरावण-वध का रहस्य जानते हैं, और पंचमुखी रूप धारण कर एक साथ पाँचों दिशाओं के दीपक बुझाकर अहिरावण का वध करते हैं। अंत में श्रीराम-लक्ष्मण को मुक्त कर पुनः शिविर लौटते हैं।
00:00 — आह्वान एवं शिविर रक्षा वर्णन (भाग 1)
02:13 — पाताल प्रवेश एवं अहिरावण वध (भाग 2)
04:00 — विजय एवं आशीर्वाद
🎵 यह रचना मूल है — कृपया इसे प्राचीन स्तोत्र न समझें। यह हनुमान जी की महिमा के प्रति एक श्रद्धांजलि है।
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