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दान या अहंकार? एक दान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत | अभय दान की जैन कथा | Jain Story #jainsmlife

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दान या अहंकार? एक दान ने बदल दी दो मित्रों की किस्मत | अभय दान की जैन कथा | Jain Story #jainsmlife

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दान या अहंकार? यह एक प्रेरक जैन कथा है जो बताती है कि दान के बाद उस पर अधिकार जताना क्यों गलत है। धर्मिल और देवली ने यात्रियों और तीर्थयात्रियों के लिए धर्मशाला बनवाई। लेकिन जब दान के साथ अहंकार, नाम, प्रसिद्धि और अधिकार का भाव जुड़ गया, तो उनकी मित्रता और जीवन की दिशा बदल गई। इस भावपूर्ण Jain Moral Story में जानिए: • दान का असली अर्थ क्या है • दान के बाद दावा क्यों नहीं करना चाहिए • अहंकार श्रेष्ठ कार्य को भी कैसे दूषित कर सकता है • कर्म और अंतिम भाव का क्या महत्व है • गुप्त दान को श्रेष्ठ क्यों कहा गया है • अभय दान का वास्तविक अर्थ क्या है इस कहानी का संदेश: दान का मूल्य धन से नहीं, दान देने वाले के भाव से तय होता है। दान के बाद दावा नहीं, केवल त्याग। वीडियो पसंद आए तो कृपया Like करें, अपने परिवार और मित्रों के साथ Share करें और JainismLife चैनल को Subscribe करके Bell Icon दबाएँ। कमेंट में लिखें: “दान के बाद दावा नहीं, केवल त्याग।” जय जिनेन्द्र 🙏 ━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━ ⏱️ Chapters 00:00 JainismLife Presents 00:10 दान या अहंकार? Cinematic Hook 00:38 घाटगांव और दो मित्र 01:30 धर्मशाला बनाने का संकल्प 02:05 मुनिराज का आगमन 02:55 अहंकार का प्रवेश 04:00 धर्मिल और देवली का संघर्ष 05:20 कर्म और अगला जन्म 05:50 शेर और जंगली सूअर का जन्म 06:35 दान का असली अर्थ 07:25 अभय दान की परीक्षा 08:40 कर्म का संदेश और जीवन की सीख 09:40 जय जिनेन्द्र #JainStory #Jainism #JainMoralStory