स्वयं को देखना हमेशा अधूरा क्यों रह जाता है? - अवलोकन - Ep3 | #JidduKrishnamurti
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स्वयं को देखना हमेशा अधूरा क्यों रह जाता है? - अवलोकन - Ep3 | #JidduKrishnamurti
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Note:
जैसा कि मैंने वीडियो की आरम्भ में भी स्पष्ट किया है — यह जिद्दू कृष्णमूर्ति की शिक्षाओं पर आधारित श्रृंखला है। यह उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं पर आधारित मेरी अपनी जाँच और अवलोकन है। मैं कृष्णमूर्ति जी की शिक्षाओं में उठने वाले प्रश्नों और दृष्टि को अपने शब्दों में देखने और समझने का प्रयास कर रहा हूँ। इसलिए यह कृष्णमूर्ति जी का प्रत्यक्ष कथन या उद्धरण नहीं है। 🙏
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About this Video:
जब मैं कहता हूँ — “मैं देख रहा हूँ” — तो क्या उस क्षण वास्तव में देखना हो रहा है, या मैं केवल अपने देखने का दावा कर रहा हूँ?
और यदि मैं यह मान लेता हूँ कि मैं स्पष्ट रूप से देख रहा हूँ, तो क्या उसी क्षण मेरा देखना किसी निश्चितता में बदल नहीं जाता?
मैं कुछ देखने के लिए देखता हूँ।
मैं कुछ समझने के लिए देखता हूँ।
मैं कुछ बदलने के लिए देखता हूँ।
मुझे स्पष्टता चाहिए।
मुझे किसी परिणाम तक पहुँचना है।
मुझे अपने भीतर कुछ बदलता हुआ देखना है।
“मुझे देखना है” और “मुझे दिख रहा है” — क्या इन दोनों में कोई अंतर है?
यह वीडियो इसी प्रश्न को खुला रखता है—
स्वयं को देखना हमेशा अधूरा क्यों रह जाता है?
ध्यान से सुनिए
यदि आप आत्म-अवलोकन, चेतना, विचार, प्रयास, मनोवैज्ञानिक संघर्ष और “जो है” के साथ रहने के प्रश्न को गंभीरता से समझना चाहते हैं, तो यह संवाद आपके लिए है।
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Title: स्वयं को देखना हमेशा अधूरा क्यों रह जाता है? | The Observation Series | अवलोकन Episode 3
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New Series:
JKArchiveHindi प्रस्तुत करता है एक नई श्रृंखला — The Observation Series | अवलोकन
अवलोकन - अपने बारे में कुछ नया जानने के लिए नहीं, बल्कि जो पहले से सामने है उसे पहली बार बिना विकृति के देखने के लिए।
‘अवलोकन’ किसी निष्कर्ष, समाधान या किसी विशेष अवस्था तक पहुँचने की श्रृंखला नहीं है। यह स्वयं को देखने की एक निरंतर जाँच है—बिना तुरंत बदलने, सुधारने या किसी निष्कर्ष पर पहुँचने की कोशिश के।
इन एपिसोड्स में हम अपने ही अनुभवों, प्रतिक्रियाओं, भय, इच्छाओं, संबंधों, विचारों और उन धारणाओं को देखेंगे जिन्हें हम अक्सर बिना जाँचे सत्य मान लेते हैं।
यहाँ प्रश्नों के तैयार उत्तर नहीं हैं।
केवल प्रश्न को जीवंत रखने का प्रयास है—ताकि देखा जा सके कि उसके भीतर वास्तव में क्या है।
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