Перейти к содержимому

रीतिकाल का अर्थ , नामकरण और विशेषताएँ

Dr. Hem raj Bhardwaj

0:00 / 0:00

रीतिकाल का अर्थ , नामकरण और विशेषताएँ

119 просмотров · 1 день назад
Dr. Hem raj Bhardwaj
5,92 тыс. подписчиков
119 просмотров · 1 день назад
रीतिकाल हिंदी साहित्य का उत्तर मध्यकाल है। इस वीडियो में रीतिकाल का अर्थ, नामकरण की समस्या और प्रमुख विशेषताएँ सरल व परीक्षा-उपयोगी शैली में समझाई गई हैं। इस व्याख्यान में आप जानेंगे: • रीति शब्द का अर्थ और रीतिकाल की परिभाषा • आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा दिया गया नाम ‘रीतिकाल’ क्यों सर्वाधिक मान्य है • मिश्रबंधु का अलंकृत काल, विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का श्रृंगारकाल तथा अन्य विद्वानों के मत • रीतिकाल का समय-सीमांकन (लगभग 1643–1843 ई. / संवत् 1700–1900) • रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त काव्यधाराएँ • प्रमुख विशेषताएँ — लक्षण ग्रंथ, श्रृंगार रस की प्रधानता, अलंकार, नायिका-भेद, ब्रजभाषा, मुक्तक शैली, दरबारी परिवेश • केशवदास, बिहारी, देव, मतिराम, घनानंद जैसे प्रमुख कवि यह कक्षा UGC NET, TGT, PGT, सहायक आचार्य, SET तथा स्नातक-स्नातकोत्तर हिंदी साहित्य के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है। व्याख्याता: डॉ. हेम राज भारद्वाज हिंदी विभाग राजकीय महाविद्यालय कुल्लू (हिमाचल प्रदेश) लाइक, शेयर और सब्सक्राइब अवश्य करें। टिप्पणी में बताएँ कि अगला विषय कौन-सा चाहिए — रीतिकाल के प्रमुख कवि, बिहारी सतसई, या रीतिमुक्त काव्य।