बृहदारण्यक उपनिषद अध्याय 5 ब्राह्मण 1 | पूर्ण में से पूर्ण कैसे? | पूर्ण ब्रह्म का रहस्य
Parmatma Ka Gyan
0:00 / 0:00
बृहदारण्यक उपनिषद अध्याय 5 ब्राह्मण 1 | पूर्ण में से पूर्ण कैसे? | पूर्ण ब्रह्म का रहस्य
1 просмотр · 2 нед. назад
Parmatma Ka Gyan
2 подписчика
1 просмотр · 2 нед. назад
बृहदारण्यक उपनिषद के अध्याय 5 के ब्राह्मण 1 को इस वीडियो में आसान और सरल हिंदी में समझिए।
इस भाग की शुरुआत प्रसिद्ध शांति-मंत्र से होती है:
“पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते…”
इस मंत्र में पूर्णता का गहरा विचार बताया गया है। जो वहाँ पूर्ण है, यह भी पूर्ण है। पूर्ण से पूर्ण प्रकट होने पर भी पूर्णता बनी रहती है। इसके बाद ब्रह्म, आकाश यानी “खं” और ओंकार से जुड़े विचारों की चर्चा आती है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
“पूर्णमदः पूर्णमिदम्” मंत्र का सरल अर्थ क्या है?
पूर्ण में से पूर्ण निकलने का क्या भाव है?
बृहदारण्यक उपनिषद में ब्रह्म को आकाश से कैसे जोड़ा गया है?
ओंकार और ब्रह्म के संबंध को कैसे समझें?
इस ब्राह्मण की शिक्षा हमारे लिए क्या अर्थ रखती है?
यह वीडियो बृहदारण्यक उपनिषद अध्याय 5, ब्राह्मण 1 के विषय पर आधारित है। इसमें मूल विचारों को आसान हिंदी में समझाने का प्रयास किया गया है, ताकि उपनिषद की गहरी बातों को समझना आसान हो।
#बृहदारण्यकउपनिषद #पूर्णमदः #ब्रह्मज्ञान