तंत्र की सबसे उग्र रात्रि - दीपावली की कालरात्रि। #deepawali2025 #diwali2025
गृहस्थ तंत्र
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गृहस्थ तंत्र
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दीपावली महा अनुष्ठानम्
पंच दिवसीय दीपावली महा अनुष्ठान में निम्नलिखित अनुष्ठान साधकों द्वारा तंत्र पीठ पर संपन्न होंगे।
1. श्री पंच दिवसीय ब्रह्मास्त्र मंदार विद्या बगलामुखी अनुष्ठानम् - इस अनुष्ठान का शुभारंभ धन त्रयोदशी से होगा तथा यह शुक्ल पक्ष द्वितीया भाई दुज तक होगा। यह अनुष्ठान भगवती अष्टम् महाविद्या बगलामुखी के तांत्रिकी लक्ष्मी स्वरूप का है जिसका अनुष्ठान व प्रयोग मुख्यतः अति विपरीत परिस्थितियों में व अति दरिद्रता के निर्मूलन हेतु किया जाता है। अनुष्ठान उपरांत आपको प्रसाद भेजा जायेगा।
2. 64 योगिनी मंडल सहित मंदार विद्या अनुष्ठान - भगवती महाविद्या बगलामुखी के मंदार विद्या अनुष्ठान के समग्र मंडल सहित उनके 64 प्रमुख महा योगिनी मातृकाओं का वृहद अनुष्ठान धन संबंधी समस्या के निवारण के साथ साथ तंत्र विद्या द्वारा संपूर्ण सुरक्षा व रक्षा हेतु भी। यह मुख्यतः श्री बगला मंदार महाविद्या का तंत्रोक्त सपर्या रहेगा। इसमें अनुष्ठान उपरांत प्रसाद सहित कलश जायेगा। कलश का उपयोग मुख्यतः रक्षा व धन दोनों हेतु किया जा सकता है।घर के ईशान कोण की भुमि में नीचे गाड़ सकतें हैं अथवा किसी भी कोण में लटका सकते हैं। पहले से उपस्थित कलश आदि के सामर्थ्य में भी इससे वृद्धि होगी अर्थात् पहले से लगे किसी भी कलश आदि को हटाना नहीं है। यह पौष्टिक ऐश्वर्य युक्त अनुष्ठान है अतः किसी ऊर्जा का क्षय नहीं होगा।
3. श्री बगला-वनदुर्गा सपर्या -- भगवती महाविद्या बगलामुखी के मंदार महाविद्या संपूर्ण तंत्रात्मक सपर्या के साथ साथ विंध्य क्षेत्र की वनदुर्गा का संपुटित चंडी पाठ अनुष्ठान व हवनात्मक प्रयोग। असाध्य कार्यों के सिद्धी हेतु भगवती वनदुर्गा का आश्रय सर्वोत्तम होता है। जहां मंदार महाविद्या संपूर्ण तंत्रात्मक सपर्या से मनोवांछित कार्य सिद्ध होंगे वहीं वनदुर्गा की उपस्थिति हर अकाट्य अभिचारिक देवता आदि को नष्ट कर परिवार की सुरक्षा व अनुष्ठान के फल की वृद्धि करेंगी। प्रथम बार इसमें महायक्षिणी के यक्षिणी मंडल का तंत्रोक्त अर्चन कुबेर मंडल सहित अलग से किया जायेगा। यक्षराज कुबेर सहित तेरह प्रमुख यक्षमंडल व भगवती के महायक्षिणी मंडल दोनों का विशेष महत्व तंत्र क्षेत्र में है। अनुष्ठान उपरांत दो संपूर्ण शतचंडी में प्रज्ज्वलित तांत्रिकी प्रतिष्ठा युक्त अखंड दीपक जो इस नवरात्र में देवी सेवा में थी वह भी प्रसाद, कलश व एक विशेष तांत्रिक रुद्राक्ष माला के साथ जायेगा। यह दीपक आप नित्य देव स्थान पर प्रज्ज्वलित कर सकते हैं। इसका अलग ही महत्व है। साथ ही माला छोटी सी होगी जो घर के देवी विग्रह (विशेष कर लक्ष्मी जी) के लिए है। अगर लक्ष्मी जी ना हों तो भगवती दुर्गा/काली को भी धारण करवा सकतें हैं। माला में 27 मनके रहेंगे व यह श्री विग्रह हेतु रहेगा। आप इसे मणिबंध आदि में धारण करने का अपराध ना करें। क्योंकि यह 27 पटल पूजन में देव प्रतिष्ठा समकक्ष प्राण प्रतिष्ठा युक्त रहेगा तथा नक्षत्र व अक्षर न्यास युक्त रहेगा। इसे केवल देव विग्रह को पहनायें। अगर यह कभी टुटता है तो आप इसे चांदी के तार में बनवा सकतें हैं तथा पुनः देवी सुक्त का 27 पाठ समर्पण कर पुनः देवी विग्रह को धारण करवा दें। अभी यह धागे में ही गुंथा हुआ जायेगा।
उपरोक्त प्रमुख अनुष्ठान याग के साथ संपूर्ण दीपावली पूजन यथा श्री गुरु मंडल, महागणपति 56 विनायक मंडल, श्री अष्टलक्ष्मी मंडल, महासरस्वती मंडल, यक्षराज कुबेर सहित धनवंतरी महामृत्युंजय वैद्यनाथ सहित भगवती कालिका योगिनी, गौमाता पूजन,देव दीपमालिका आदि का भी याग विशेष सम्मिलित रहेगा।
तथा संभव हुआ तो सभी संकल्पित साधकों के निमित्त एक तंत्र अभिचार नाशक अनुष्ठान हवनात्मक अलग से होगा। काफी समय हो गया यह हुये।
संबंधित अनुष्ठान हेतु विवरण आप https://www.grihasthpujansamagri.com पर पधारकर दे सकते हैं।