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मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - ।८१ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी

Shree Chaitanya Ram

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मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - ।८१ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी

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Shree Chaitanya Ram
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मना मत्सरे नाम सांडूं नको हो। अती आदरे हा निजध्यास राहो॥ समस्तांमधे नाम हे सार आहे। दुजी तूळणा तूळितांही न साहे॥ ८१॥