अरि-दल थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा! | Maharana Pratap Song | Haldighati | Padharo Beats
Padharo Beats
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अरि-दल थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा! | Maharana Pratap Song | Haldighati | Padharo Beats
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अरि-दल थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा! | Maharana Pratap Song | Haldighati | Padharo Beats
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⚔️ Padharo Beats presents “जय महाराणा” — a powerful cinematic historical anthem dedicated to Maharana Pratap, the pride of Mewar and the immortal symbol of Rajputana स्वाभिमान.
This song brings alive the वीर रस of Haldighati, the loyalty of Chetak, the sacrifice of Jhala Maan, the support of Bhamashah, the courage of Bhil warriors, and the unbreakable spirit of Mewar.
अगर आपको Maharana Pratap songs, Haldighati songs, Chetak songs, Mewar history, Rajputana songs, Rajasthani warrior songs और historical anthem पसंद हैं, तो video को Like, Share और Subscribe जरूर करें।
Comment below: जय महाराणा प्रताप! अमर चेतक!
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Lyrics
एकलिंग की जय! महाराणा की जय!
एकलिंग की जय! महाराणा की जय!
रण-बीच भयंकर आग उठा, जब खड़ग हाथ प्रताप उठा!
अरि-दल थर-थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा!
हल्दीघाटी की माटी गूंजे, प्रताप-प्रताप-प्रताप रे!
मुगलों की छाती दहल उठी, सुन कर के उसकी ताप रे!
मेवाड़ मुकुट, जय महाराणा!
स्वाभिमान, जय महाराणा!
मुगलों की टिड्डी-दल सेना, रजपूत वीर थे गिने-चुने,
पर हल्दीघाटी घाटी में, बस राणा के जयकार सुने।
हाथी से हाथी जूझ पड़े, और घोड़े पर घोड़े टूटे,
राणा के भाले के आगे, मुगलों के तीर-कमान छूटे।
कट-कट कर गिरे अरि-मस्तक, बह चली रक्त की धार वहां,
साक्षात महाकाल बन कर, करता था हाहाकार वहां।
रण-बीच भयंकर आग उठा, जब खड़ग हाथ प्रताप उठा!
अरि-दल थर-थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा!
हल्दीघाटी की माटी गूंजे, प्रताप-प्रताप-प्रताप रे!
जब घिरा सिंह मुगलों रण में, तब झाला मान मचल आया,
ले मुकुट शीश पर अपने ही, स्वामी का प्राण बचा लाया।
फिर याद करो दिवेर समर, राणा का खड़ग चला ऐसा,
बहलोल खान को घोड़े समेत, दो-फाड़ किया था वैसा!
बिजली सी गिरी कटार वहां, हाहाकार मचा था भारी,
अकबर का घमंड टूट गया, देख प्रताप की रण-तैयारी।
महलों का सुख सब छोड़ दिया, वन-वन में कंटक राह चुनी,
घास की रोटी खायी पर, मुगलों की एक न बात सुनी।
भील सरदारों ने दिया साथ, हर कदम पे सीना तान खड़े,
धन्य हुआ वो भामाशाह, धन दे कर राणा साथ अड़े।
राणा ने फिर हुंकार भरी, मुगलों का मर्दन ठान लिया,
मेवाड़ भूमि को आज़ाद कराने का पूरा प्रण ठान लिया।
रण-बीच भयंकर आग उठा, जब खड़ग हाथ प्रताप उठा!
अरि-दल थर-थर-थर कांप उठा, जब चेतक पर प्रताप उठा!
मेवाड़ मुकुट, जय महाराणा!
स्वाभिमान, जय महाराणा!
रण में घायल था चेतक-तन, पर स्वामी-भक्ति का ज्वार था,
पीछे थे यमराज खड़े, आगे नाले का पार था।
रख कर जान हथेली पर, वो पवन-वेग से उड़ आया,
छब्बीस फुट चौड़ा नाला, एक छलांग में पार कराया।
राणा को कर सुरक्षित, वो वीर अश्व फिर गिर पड़ा,
राणा की गोदी में चेतक, ले अंतिम सांसें स्वर्ग उड़ा।
रो पड़ा वीर मेवाड़-पति, अश्रुओं की धार बह निकली...
चेतक की वो अमर कथा, युग-युग के मस्तक पर लिख दी...
जय महाराणा... अमर चेतक...
जय महाराणा... अमर चेतक...
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