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वंदनीया माताजी का अंतिम संदेश और महाप्रयाण 🙏 | 19 सितंबर 1994, भाद्रपद पूर्णिमा | युग निर्माण योजना

Yug Sahitya

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वंदनीया माताजी का अंतिम संदेश और महाप्रयाण 🙏 | 19 सितंबर 1994, भाद्रपद पूर्णिमा | युग निर्माण योजना

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Yug Sahitya
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ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्। 🙏 आज भाद्रपद पूर्णिमा के पावन अवसर पर परम वंदनीया माताजी के महाप्रयाण दिवस को श्रद्धापूर्वक स्मरण। 19 सितंबर 1994, भाद्रपद पूर्णिमा को वंदनीया माताजी ने अपना भौतिक शरीर छोड़ा। शरीर-यात्रा समाप्त होने से पहले उन्होंने अपने आत्मीय परिजनों के लिए जो संदेश दिया, उसमें उनके वात्सल्य, मिशन के प्रति समर्पण और भविष्य के युग-निर्माण का अद्भुत संकल्प दिखाई देता है। 🌹 माताजी का अंतिम संदेश “यह न समझें कि हम स्वजनों से दूर हो जाएँगे। परमपूज्य गुरुदेव की सूक्ष्म और कारण सत्ता में विलीन होकर हम अपने आत्मीय कुटुंबियों को अधिक प्यार बाँटेंगे, उनकी सुख-सुविधाओं में अधिक सहायक होंगे।” और उनका यह संकल्प आज भी प्रेरणा देता है— “हम तब तक रुकें नहीं, जब तक धरती पर स्वर्ग और मनुष्य में देवत्व का अभ्युदय स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर न होने लगे।” इस वीडियो में युग निर्माण योजना पत्रिका सितंबर 2026 के “वंदनीया माताजी एवं अखंड दीप जनशताब्दी विशेषांक” के संदर्भ से माताजी के जीवन, महाप्रयाण और उनके अंतिम संदेश को श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत किया गया है। 🙏 वंदनीया माताजी के चरणों में शत-शत नमन। 🙏 पूज्य गुरुदेव एवं माताजी का आशीर्वाद हम सभी पर बना रहे। #वंदनीयामाताजी #माताजी #माताजीअंतिमसंदेश #महाप्रयाणदिवस #भाद्रपदपूर्णिमा #19सितंबर1994 #युगनिर्माणयोजना #गायत्रीपरिवार #शांतिकुंज #अखंडदीप #मातृसत्ता #युगनिर्माण #गुरुदेव #गायत्रीतपोभूमि #जनशताब्दीविशेषांक