आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
Attari Islamic studio
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आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा
26 просмотров · 3 дня назад
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सलामी और आदाब! 🌟
ख़ास आपके दिल को छूने के लिए पेश है एक रूहानी और दर्द भरी सूफ़ी ग़ज़ल, जो रात की तन्हाई, अधूरे ख़्वाबों और दिल के जज़्बात को बयाँ करती है। अगर आपको भी तन्हाई में शायरी और सुकून पसंद है, तो यह ग़ज़ल सीधे आपके दिल में उतर जाएगी।
🎵 ग़ज़ल के बोल (Lyrics):
"आज फिर नींद को आँखों से बिछड़ते देखा,
रात भर ख़्वाब को पलकों से उतरते देखा..."
✍️ शायर (Shayar): मोहम्मद नासिर (Mohd Nasir)
🎤 आवाज़ / संगीत (Vocals/Music): [यहाँ गायक या एआई टूल का नाम लिखें, जैसे- Suno AI / Soulful Male Vocals]
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