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गिरिडीह उपचुनाव : श्वेता शर्मा मंत्री बनेंगी, तो सोमेश सोरेन क्यों नहीं? Hemant Soren पर बड़ा सवाल

Jan-Man Ki Baat

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गिरिडीह उपचुनाव : श्वेता शर्मा मंत्री बनेंगी, तो सोमेश सोरेन क्यों नहीं? Hemant Soren पर बड़ा सवाल

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क्या श्वेता शर्मा को गिरिडीह उपचुनाव से पहले मंत्री बनाया जा सकता है? अगर ऐसा होता है तो झारखंड की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा होगा—सोमेश सोरेन को मंत्री क्यों नहीं बनाया गया? दिवंगत शिक्षा मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू की पत्नी श्वेता शर्मा ने 28 सितंबर को पहली बार झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ राजनीतिक बैठक में हिस्सा लिया और अपने पति की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कार्यकर्ताओं से सहयोग मांगा। राजनीतिक चर्चा है कि उन्हें गिरिडीह उपचुनाव में झामुमो का उम्मीदवार बनाया जा सकता है और मंत्री पद भी मिल सकता है। लेकिन दूसरी तरफ घाटशिला उपचुनाव में दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश चंद्र सोरेन ने 1,04,794 वोट हासिल कर 38,524 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की, फिर भी उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया। वीडियो में इसी सवाल पर विस्तार से चर्चा— हफीजुल हसन को मंत्री बनाने का राजनीतिक संदर्भ बेबी देवी को मंत्री बनाने के पीछे का समीकरण श्वेता शर्मा को मंत्री बनाने की संभावना सोमेश सोरेन को मंत्री क्यों नहीं बनाया गया? क्या झामुमो आदिवासी वोट को अपना स्थायी वोट बैंक मानता है? क्या जातीय और सामाजिक समीकरण झारखंड की राजनीति में निर्णायक हो रहे हैं? मायावती की राजनीति से क्या सबक मिलता है? क्या किसी भी समुदाय के वोट को स्थायी राजनीतिक संपत्ति मानना जोखिम भरा हो सकता है? Disclaimer : यह वीडियो किसी व्यक्ति के पक्ष या विरोध में नहीं, बल्कि झारखंड की बदलती राजनीतिक रणनीति और सामाजिक समीकरणों का विश्लेषण है। #ShwetaSharma #SomeshSoren #HemantSoren #JharkhandPolitics #JMM #Giridih #Ghatsila #झारखंडराजनीति @_AnandKumar ​