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रामायणी साधना सत्संग**दूसरी बैठक भाग- ४**लीला जो भगवान ने करी है, ‪@bhaktimeshakti2281‬

Bhakti me Shakti

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रामायणी साधना सत्संग**दूसरी बैठक भाग- ४**लीला जो भगवान ने करी है, ‪@bhaktimeshakti2281‬

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Ram bhakti ‪@bhaktimeshakti2281‬ परम पूज्य डॉक्टर श्री विश्वामित्र जी महाराज जी के मुखारविंद से ((2088)) रामायणी साधना सत्संग दूसरी बैठक भाग- ४ लीला जो भगवान ने करी है, जो परब्रह्म परमात्मा ने करी है, मैं कहता हूं आप तो साधक हो ना इसलिए हमें नोक झोंक करने की कोई आवश्यकता नहीं । साधक वह जो श्रद्धावान । राम हुए है या नहीं हुए हैं, कब हुए हैं, इन बातों में समय व्यर्थ ना गंवाइएगा । इस राम ने क्या-क्या करके आपको दिखाया है वह देखिएगा, फिर उसे जीवन में उतारने का प्रयत्न कीजिएगा । एक महानतम व्यक्ति, एक महानतम सत्ता, सर्वोच्च सत्ता, जिससे बढ़कर और कुछ नहीं है, वह इस धरती पर इंसान बनकर रह गया है, पत्नी के प्यार में रोया है, पिता की आज्ञा का पालन किया है, एक शिष्य बना है, एक सेवक बना है, एक भाई बना है, एक पुत्र बना है, एक बाप बना है, कितना कुछ बनकर एक नर लीला करके चला गया है । क्या यह अनुकरणीय नहीं है, क्या यह सराहनीय बात नहीं ? हम तुच्छ हैं तो अपने आप को महान व्यक्त करने की कोशिश करते हैं । वह महानतम है और अपने आप को एक छोटा सा एक इंसान, मामूली इंसान बनाकर तो चले गए । जो कुछ प्रभु राम ने किया है, वही हमारे जीवन में अनुकरणीय । भगवान कृष्ण के लिए लोग कहते हैं कृपया बुरा नहीं मानिएगा, जो कुछ उन्होंने किया है वह सबके लिए अनुकरणीय नहीं । लेकिन भगवान राम के लिए कहते जो कुछ इन्होंने अपने जीवन में किया है वह अक्षरश: अनुकरणीय है, अनुसरणीय है । बहुत उच्च कोटि की भूमिका इन्होंने निभाई है । तभी संत महात्मा ठोक बजाकर कहते हैं राम आप जैसा ना आपसे पहले था, ना अब है, और ना ही कोई होगा । अपने जैसे आप ही हैं । ऐसा संत महात्मा ठोक बजाकर प्रभु राम के लिए कहते हैं । कल उन्हीं की चर्चा आरंभ होने जा रही है, राम कथा । आज माताओं सोने से पहले तनिक विचार करना । स्वामी जी महाराज 60 साल की आयु तक तो आर्यसमाजी ।‌ आज के किसी आर्यसमाजी को कह कर देखो आप राम कथा करें, रामायण जी की चर्चा करें, कभी नहीं करेगा । स्वामी जी महाराज ने कितना साहस पूर्वक काम किया है । कितनी आलोचनाएं सही होंगीं, लेकिन राम कथा नहीं छोड़ी, कोई कारण होगा । स्वामी जी महाराज कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे । 60 वर्ष की आयु तक वहां रहे हैं आर्य समाज में, और आर्य समाज की stage से रामायण की कथा करते रहे हैं, रामकथा करते रहे हैं । स्वामी जी महाराज की ख्याति, उनकी प्रसिद्धि राम नाम से तो बाद में हुई । लेकिन पहले इससे उनकी राम कथा सुनने का बहुत आनंद आता है, मंत्रमुग्ध कर देते हैं स्वामी जी महाराज । यह आर्य समाजी भी कहते और दूसरे लोग भी कहते, जब वह राम कथा करते हैं तो व्यक्ति मंत्रमुग्ध हो जाता है । कोई कारण होगा कि उन्होंने राम कथा ही चुनी । ऐसा तो नहीं है कि उन्होंने वेदों का अध्ययन नहीं किया, गीता जी तभी रची जिस वक्त वह आर्य समाज में थे । गीता जी पर क्यों नहीं प्रवचन किए उन्होंने, वेदों पर क्यों नहीं प्रवचन किए उन्होंने, उपनिषदों पर क्यों नहीं प्रवचन किए उन्होंने । लिखे हैं लेकिन प्रवचन नहीं किए । प्रवचन उन्होंने रामायण पर ही किए हैं । आप उनके जितने भी चित्र देखते हैं, वह देखो सामने cut-out हैं, उनके हाथ में रामायण ही पकड़ी हुई है, भक्ति प्रकाश नहीं, देखे आप रामायण पकड़ी हुई है । क्यों ? कल इसी रामायण की चर्चा आरंभ होने जा रही है । मानो स्वामी जी महाराज को भी प्रभु राम का व्यक्तित्व जो है, मर्यादा पुरुषोत्तम नहीं, परम ब्रह्म परमात्मा नहीं, जो कुछ मर्जी कहे उन्होंने अपने मन में उनके लिए क्या धारणा कर रखी है, कि उन्होंने बहुत अच्छे ढंग से बहुत स्पष्टतया व्यक्त नहीं किया है, यह छोड़ा है हम लोगों पर खोज कीजिएगा, ढूंढो वह कौन है, खोज कीजिएगा, यह पद छोड़ा हुआ है । लेकिन इतना ऊंचा व्यक्तित्व उनके मन को भाया होगा, तभी उन्होंने राम कथा करनी जो है वह आरंभ करी है । तभी उन्होंने वाल्मीकि रामायण इतने मोटे-मोटे ग्रंथ है, इतने सारे, उनको एक छोटे से ग्रंथ में रख दिया, बनाकर रच दिया । इतने छोटे से ग्रंथ में 600 पृष्ठों का ग्रंथ बनाकर हमारे लिए रख दिया, बस यही है सब कुछ, पढ़िएगा इसे। प्रभु राम एक आदर्श पुत्र, एक आदर्श भाई, एक आदर्श शिष्य, एक आदर्श सेवक, एक आदर्श राजा, एक आदर्श पति, एक आदर्श शत्रु, एक आदर्श गुरु, जो कुछ भी आप प्रभु के जीवन में देखते है जो कुछ भी उनके व्यक्तित्व में आपको दिखाई देता है, आदर्श से कम तो नहीं है । एक व्यक्ति होने पर भी, एक व्यक्ति अवतरित होते हुए भी, एक व्यक्ति की भूमिका निभाते हुए भी उन्होंने किसी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया । हम क्या हैं, हर पग-पग पर मर्यादा का उल्लंघन करते हैं हम । उन्होंने इतनी भूमिकाएं निभाई है लेकिन किसी भी भूमिका में कभी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया । एक आदर्श बाप, कई बार मन में अनेक प्रकार के संदेह उठते हैं उनके प्रति । कहीं-कहीं बहुत स्थानों पर नहीं, कहीं एक दुके स्थानों पर कभी मन में प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है, कि ऐसा क्यों किया ? संत महात्मा कहते हैं भाई आप अपनी बुद्धि के अनुसार सोच रहे हो, इसलिए यह प्रश्न है । काश उनके मन में क्या था, उनकी भावना, करने वाले की भावना किस प्रकार की थी, आप अपना मन उनके मन के साथ मिला सको, तो बताओ की गलती है या नहीं ? एक आदर्श पिता । कहते हैं एक दफा महल में बैठे हुए राजा दशरथ, कौशल्या बैठी हुई है । आपस में चर्चा चल रही है । अकेले हैं उनको पता नहीं कि उनकी चर्चा को प्रभु राम कही सुन रहे हैं । किसी ऐसी जगह पर खड़े हैं जहां उनको दिखाई नहीं दे रहे प्रभु राम, लेकिन उनकी चर्चा को सुन रहे हैं, क्या चर्चा चल रही है ? कौशल्या राम हमसे सब बातों में आगे हैं। कोई ऐसी चीज नहीं दिखाई देती जिसमें हमारा राम हमसे आगे नहीं हैं । पर लगता है एक बात में वह हमसे पीछे रहेगा । कौशल्या बड़ी चकित, प्रभु ऐसी कौन सी चीज है, ऐसा कौन सा गुण है, जो राम में नहीं है, और जिसमें वह पीछे रहेगा हमसे ।