Перейти к содержимому

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 12 | "वह मेरा भाई है!" लक्ष्मी जी की विनती और भगवान विष्णु का वचन |

Jai mata di

0:00 / 0:00

कार्तिक माहात्म्य अध्याय 12 | "वह मेरा भाई है!" लक्ष्मी जी की विनती और भगवान विष्णु का वचन |

4 просмотра · 2 ч назад
Jai mata di
10,4 тыс. подписчиков
4 просмотра · 2 ч назад
🙏 जय श्री कृष्ण! कार्तिक मास माहात्म्य का बारहवाँ अध्याय 🙏 भगवान गरुड़ पर बैठ चुके थे। तभी माता लक्ष्मी ने उन्हें रोक लिया और कहा कि जिससे आप युद्ध करने जा रहे हैं, वह मेरा भाई है। भगवान ने जो उत्तर दिया, वही इस अध्याय का सबसे सुंदर क्षण है। इस वीडियो में सुनिए: 🏃 देवताओं का गुफाओं से वैकुण्ठ तक का सफ़र 🙏 करुणा-सागर भगवान विष्णु का अभय: "हे देवताओ, तुम भय का त्याग करो" 👁️ "मैं जलंधर को देखूँगा", भगवान ने "देखूँगा" ही क्यों कहा 🦅 गरुड़ पर आरूढ़ भगवान विष्णु 💞 माता लक्ष्मी की विनती: "मेरा भाई आपके द्वारा नहीं मारा जाना चाहिए" ⚖️ भगवान के दो वचन: लक्ष्मी जी के लिए और देवताओं के लिए ⚔️ जलंधर और विष्णु का युद्ध, देवताओं का सिंहनाद 🌪️ गरुड़ के पंखों की आँधी 😡 जलंधर के उद्धत वचन 🧑‍🤝‍🧑 कार्तिक की भाई दूज का एक भाव 🌿 वृंदा और तुलसी जी की कथा से कड़ी 🔜 अगले अध्याय में: शार्ङ्ग धनुष की टंकार से गूँजा त्रिलोक 📚 स्रोत: पद्म पुराण, कार्तिक माहात्म्य (नारद-पृथु संवाद) ℹ️ वैकुण्ठ का वर्णन, देवताओं की पुकार का भाव और भाई दूज की तुलना भाव-चिंतन है, पाठ का कथन नहीं। जलंधर का अंत कैसे होगा, यह आगे के अध्यायों में आता है। कथा के कुछ प्रसंग अलग-अलग पाठों में भिन्न मिलते हैं। कृपया अपनी कुल-परंपरा और गुरु की आज्ञा के अनुसार पालन करें।