Ravindra Ramayan | रामायण - बालकाण्ड | भाग ३ | Ravindra Jain
Ravindra Jain
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बालकाण्ड वाल्मीकि कृत रामायण और गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस का प्रथम भाग (काण्ड या सोपान) है। बालकाण्ड में प्रभु श्री राम के जन्म से लेकर राम सीता विवाह तक के घटनाक्रम आते हैं। गोस्वामी तुलसीदास कृत श्री राम चरित मानस के बाल काण्ड में 7 श्लोक, 341 दोहा, 25 सोरठा, 39 छंद- 39 एवं 358 चौपाई है ।
संक्षेप में ये कथा इस प्रकार है ।
अयोध्या नगरी में दशरथ नाम के राजा हुये जिनकी कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा नामक पत्नियाँ थीं। संतान प्राप्ति हेतु अयोध्यापति दशरथ ने अपने गुरु श्री वशिष्ठ की आज्ञा से पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया जिसे कि ऋंगी ऋषि ने सम्पन्न किया। भक्तिपूर्ण आहुतियाँ पाकर अग्निदेव प्रसन्न हुये और उन्होंने स्वयं प्रकट होकर राजा दशरथ को हविष्यपात्र (खीर, पायस) दिया जिसे कि उन्होंने अपनी तीनों पत्नियों में बाँट दिया। खीर के सेवन के परिणामस्वरूप कौशल्या के गर्भ से राम का, कैकेयी के गर्भ से भरत का तथा सुमित्रा के गर्भ से लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
राजकुमारों के बड़े होने पर आश्रम की राक्षसों से रक्षा हेतु ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से राम और लक्ष्मण को मांग कर अपने साथ ले गये। राम ने ताड़का और सुबाहु जैसे राक्षसों को मार डाला और मारीच को बिना फल वाले बाण से मार कर समुद्र के पार भेज दिया। उधर लक्ष्मण ने राक्षसों की सारी सेना का संहार कर डाला। धनुषयज्ञ हेतु राजा जनक के निमंत्रण मिलने पर विश्वामित्र राम और लक्ष्मण के साथ उनकी नगरी मिथिला (जनकपुर) आ गये। रास्ते में राम ने गौतम मुनि की स्त्री अहल्या का उद्धार किया। मिथिला में राजा जनक की पुत्री सीता जिन्हें कि जानकी के नाम से भी जाना जाता है का स्वयंवर का भी आयोजन था जहाँ कि जनकप्रतिज्ञा के अनुसार शिवधनुष को तोड़ कर राम ने सीता से विवाह किया। राम और सीता के विवाह के साथ ही साथ गुरु वशिष्ठ ने भरत का माण्डवी से, लक्ष्मण का उर्मिला से और शत्रुघ्न का श्रुतकीर्ति से करवा दिया।
"सीता श्रद्धा देश की राम अटल विश्वास।रामायण तुलसी रचित हम तुलसी के दास।"
रवीन्द्र जैन जी द्वारा स्वयं और तुलसी रचित और संगीतबद्ध चोपाईयां घर घर तक रामायण सीरियल के द्वारा पहुंचायी तब रवीन्द्र जैन रचित चोपाईयों को तुलसी रचित चोपाई समझते थे। रवीन्द्र जैन जी ने रामायण को सरल शब्दों में कभी सीरियल कभी नृत्यनाटिका तो कभी चोपाईयों के रूप में अनेकों बार रचा तब हृदय में राम ने कहा रवीन्द्र तुम मुझे कितनी बार अपनी आत्मा की आवाज से पुकारते हो कभी मुझे तुलसी की तरह कलम से शब्दों में निखारो। रवीन्द्र चल पढ़े उस डगर पर और सुंदर सरल सुपावन रवीन्द्र रामायण रच डाली जो आज आपके समक्ष है।
प्रभात प्रकाशन द्वारा रवीन्द्र रामायण को जन जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया गया और उसे संगीतबद्ध कर श्री द्वारकाधीश किर्येशन के सुभाष गुप्ता जी ने ओडियो और वीडियो के रूप में जन जन तक पहुंचाया। आज आर जे ग्रुप उसी रवीन्द्र रामायण को आपके समक्ष यूट्यूब पर अपलोड करते हुए बहुत हर्ष हो रहा है कि हम रवीन्द्र जैन जी के चाहने वालों की इच्छा पूरी कर रहे हैं।
After years of composing Ramayan and bhajans of Shri Ram, Ravindra Jain in the last decade decided to put pen to paper and write his own Ravindra Ramayan.
Music Director: Ravindra Jain
Author/Lyricist: Ravindra Jain
Singer: Ravindra Jain
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