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देवतालाब शिव मंदिर रीवा | devtalab mandir rewa | देवतालाब का मंदिर rewa ka mandir

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देवतालाब शिव मंदिर रीवा | devtalab mandir rewa | देवतालाब का मंदिर rewa ka mandir

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देवतालाब शिव मंदिर रीवा | devtalab mandir rewa | देवतालाब का मंदिर rewa ka mandir 🌹🌹 हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें🌹🌹 वीडियो को लाइक करें 🙏🙏 देवतालाब की प्रसिद्धि का कारण यहाँ स्थित शिव मंदिर है जिसके बारे में आसपास के लोगों में मान्यता है कि यह एक ही पत्थर का बना हुआ मंदिर है जिसे स्वयं विश्वकर्मा ने एक ही रात में निर्मित किया था। यहाँ प्रतिवर्ष तीन मेले आयोजित होते हैं और काफ़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। एक रात में, एक पत्थर से बनें मंदिर में स्थापित है आलौकिक शिवलिंग रीवा के देवतालाब स्थिति शिव मन्दिर वर्षों से क्षेत्र के लोगों में आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां मंदिर में हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शिव मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं, देवतालाब मंदिर को लेकर वहां के रहवासिओं के अनुसार कहा जाता है की यह विशाल मंदिर एक ही पत्थर में बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण रातो-रात हुआ था और इसे स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने बनाया था। देवतालाब मंदिर को लेकर बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एक ही रात में हुआ। ऐसा कहा जाता है कि रात को मंदिर नहीं था लेकिन सुबह जब लोगों ने देखा तो यहां पर विशाल मंदिर बना हुआ मिला था लेकिन किसी को यह जानकारी नहीं है की मंदिर का निर्माण किसने करवाया, और कैसे हुआ। पूर्वजों ने बताया की मंदिर के साथ ही यहां पर आलौकिक शिवलिंग का भी उत्पत्ति हुई थी। यह शिवलिंग काफी रहस्यमयी है, यहां शिवलिंग दिन में चार बार रंग बदलती है। एक किदवंती है कि शिव के परम भक्त महर्षि मार्कण्डेय देवतालाब में शिव के दर्शन की ज़िद में साधना में लीन थे और जब भगवान शिव ने भगवान विश्वकर्मा को मंदिर बनवाने के लिए आदेशित किया की वे महर्षि को दर्शन देने के लिए यहां निर्माण करवाएं। उसके बाद रातों रात यहां विशाल मंदिर का निर्माण हुआ और शिवलिंग की स्थापना हुई। शिव' की नगरी 'देवतालाब' का नाम ही तालाब से मिलकर बना है। देवतालाब मंदिर के आसपास कई तालाब हैं। वैसे देवतालाव में कई तालाबों का होना, यहां की विशेषता है। शिव मंदिर प्रांगण में जो तालाब है यह 'शिव-कुंड' के नाम से प्रसिद्ध है। इस कुंड से जल भरकर ही श्रद्धालु सदाशिव भोलेनाथ के पंच शिवलिंग पर जल चढ़ाया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर के आसपास के क्षेत्रों के लोगों के अनुसार माना जाता है की ऐसी है कि शिव-कुंड से पांच बार जल लेकर पांचों मंदिर में जल चढ़ाया जाता है मंदिर के नीचें है दूसरा मंदिर, ये भी है मान्यता मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर के नीचे शिव का एक दूसरा मंदिर भी है जिसमें चमत्कारिक मणि मौजूद है। कई वर्षों पहले मंदिर के तहखाने से लगातार सांप बिच्छुओं के निकलने की वजह से मंदिर का दरवाजा बंद कर दिया गया है। मंदिर के ठीक सामने एक गढ़ी भी मौजूद थी यहां का राजा नास्तिक था। कहा जाता है कि इस मंदिर को गिरवाने के लिए राजा ने योजना बनाई थी, जैसे ही राजा ने योजना बनाना शुरु की अचानक उसी वक्त पूरा राजवंश जमीन के नीचे दबकर नष्ट हो गया। ऐसा माना जाता कि देवतालाब के दर्शन से चारोधाम की यात्रा पूरी होती है। मंदिर से भक्तों की आस्था जुडी हुई है, यहां प्रति वर्ष तीन मेले लगते है और इसी आस्था से प्रति माह हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है। 🌹🌹 please subscribe to my youtube channel 🌹🌹 #devtalab_ka_mandir #devtalab_mandir_ka_rahasya #devtalab_mandir_rewa #hindivlog #vlogvideo THANK-YOU 🙏👍👍