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अबू तालिब की आख़िरी बीमारी… मक्का का एक बड़ा सहारा टूटने वाला था

Great Thinker OF Human

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अबू तालिब की आख़िरी बीमारी… मक्का का एक बड़ा सहारा टूटने वाला था

237 просмотров · 7 дней назад
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मक्का की वह दर्दनाक कहानी… जब ईमान वालों पर ज़ुल्म की इंतिहा कर दी गई। यह वीडियो हमें मक्का के उस कठिन दौर में ले जाता है, जब क़ुरैश ने बनू हाशिम और बनू मुत्तलिब का सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार कर दिया। लगभग तीन वर्षों तक शِعبِ ابی طالب में भूख, प्यास, तन्हाई और कठिनाइयों के बीच सब्र का इम्तिहान चलता रहा। फिर वह दौर आया जब صحیفہ के खत्म होने की खबर सामने आई… और बहिष्कार समाप्त हुआ। लेकिन मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। अबू तालिब की बीमारी और वफ़ात, फिर ख़दीजा رضي الله تعالى عنها की वफ़ात ने मक्का के उस दौर को और भी गमगीन बना दिया। यही वह दौर था जिसे आमُ الحُزن — ग़म का साल कहा जाता है। इसके बाद दावत मक्का से बाहर पहुँची। यसरिब से लोग आए, संदेश सुना, बैअत-ए-अक़बा हुई और धीरे-धीरे मुसलमानों के लिए एक नई राह खुली। सहाबा رضي الله عنهم ने अपना घर-बार छोड़ा और हिजरत का सिलसिला शुरू हुआ। और फिर आया वह ऐतिहासिक लम्हा… जब मुहम्मद صلی اللہ علیہ وسلم ने अबू बक्र رضي الله عنه के साथ मक्का से हिजरत की। यह सिर्फ़ इतिहास की कहानी नहीं—यह सब्र, कुर्बानी, वफ़ादारी, ईमान और अल्लाह पर भरोसे की एक लंबी दास्तान है। अगर यह वीडियो आपके दिल को छू जाए, तो इसे दूसरों तक ज़रूर पहुँचाएँ। शायद आपकी एक शेयर किसी ऐसे व्यक्ति तक यह कहानी पहुँचा दे जिसे अपने दीन और इतिहास की इस महान दास्तान को जानने की ज़रूरत है।