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Sayyad Aminul Qadri Sahab Zikr Eman e Abu Talib Alaihisslam Ek Maulvi ko Hazam na hua Aur

Aarifi Studio

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Sayyad Aminul Qadri Sahab Zikr Eman e Abu Talib Alaihisslam Ek Maulvi ko Hazam na hua Aur

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#AarifiStudio#SayyadSahab#SayyadAmeenulQaadri #Aarifi हुज़ूर का निकाह हज़रत अबु तालिब अलैहि सलाम ने पढ़ाया और महेर भी ख़ुद ही अदा किया इमाम जौज़ी ने रिवायत किया इमाम बदरुद्दीन हल्बी ने रिवायत किया शैख़ अब्दुल हक़ मुहद्दिस देहलवी ने रिवायत किया इमाम सुहैली ने रिवायत किया अल्लामा ज़हनी दहलान ने रिवायत किया अल्लामा इब्ने ख़ल्दून ने रिवायत किया और भी दीगर मुहद्दिसीन ने रिवायत किया और इसमें कोई इख़्तिलाफ़ भी नही है के आक़ा सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम का निकाह हज़रत अबु तालिब ने सय्यदा खदिजतुल कुबरा सलामुल्लाह अलैहा से पढ़ाया निकाह का ख़ुत्बा हज़रते अबु तालिब ने ख़ुद पढ़ा और जो महेर मुक़र्रर हुआ 12 औकिया और 20 ऊँटनियों का ये महेर भी हज़रते अबु तालिब ने ख़ुद अपनी जेब से अदा किया ग़ौर तलब बात ये भी है कि जब हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का निकाह हज़रते हव्वा से हुआ तो महेर की अदायगी के लिए अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया की मेरे हबीब पर दुरूद पढ़ो यही तुम्हारा महेर है लोगों ज़रा दयानत से सोचो ठंडी तबियत से सोचो हज़रते आदम का निकाह हो तो महेर मुस्तफ़ा पे दुरूद का रखा जाये अल्लाह को इसके सिवा कोई महेर गवारा नही क्योकि इसी सल्ब से नबियों को आना है और जब मुस्तफ़ा का निकाह हो तो महेर माज़अल्लाह किसी काफ़िर की जेब से क़ुबूल कर लिया जाये ????? शर्म नही आती तुम्हे ऐसा अक़ीदा रखते हुए हज़रते अबु तालिब अलैहिस्सलाम ने सिर्फ़ निकाह का ख़ुत्बा ही नही पढ़ा बल्कि मुस्तफ़ा की तरफ़ से महेर भी ख़ुद अदा किया हज़रते सय्यदा ख़दिजतुल कुबरा सलामुल्लाह अलैह मेरे आक़ा की पहली रफ़ीक़े हयात ताजदारे कायनात सल्लल्लाहो अलैहे वा आलेही वा सल्लम की सारी औलाद की माँ है अरे ये सय्यदा फ़ातिमा सलामुल्लाह अलैहा की माँ है हसनैन करीमैन की नानी हैं हुज़ूर हमेशा सय्यदा ख़दिजतुल कुबरा को याद किया करते थे अल्लाह को कैसे गवारा होगा की किसी काफ़िर से अपने हबीब सय्यदुल अम्बिया के निकाह का ख़ुत्बा पढ़ाये और महेर भी अदा कराए फिर सोचो आदम अलैहिस्सलाम का महेर मुस्तफ़ा पर दुरूद पढ़ना और मुस्तफ़ा का महेर कोई काफ़िर अदा करे ??? ताज्जुब की बात है नही हरगिज़ ऐसा नही ये अक़ीदा दुरुस्त नही ये अज़्मते मुस्तफ़ा का मामला है ज़रा सोच सम्भल कर बात करो होश के नाख़ून लो हम वो जमाअत हैं जो हुज़ूर की नालैन शरीफ़ का भी अदब ओ एहतेराम करते हैं उसे कभी हम सिर्फ़ जूता नही कहते क्या हो गया उन लोगों को जो कलमा नबी का पढ़ते है और ऐसे ऐतराज़ भी करते है दावत ए तौहीद हज़रते अबु तालिब के घर से दी गयी इश्आत ए इस्लाम हज़रते अबु तालिब के घर से हुई इस्लाम की इब्तेदा पहली दावत पहली मजलिस हज़रते अबु तालिब के घर से हुई और जब इस्लाम के तहफ़्फ़ुज़ के लिए ख़ून बहाना हुआ तो इसी घर ने कुर्बानियां पेश की जिसमे 6 माह का मासूम भी शामिल है और 56 साल का ताजदार भी अल्लाहुम्मा सल्लेअला मुहम्मद वा अला आले मुहम्मद।🙏🙇🏻‍♂️🙏 🖋️ सय्यद मोहम्म्द बिन जावेद फ़ातिमी