Swamiji ka utsv Pratham din कौतुक देखन जाही Prem Saheli is live #premsaheli #viral #video#viralvideo
Prem Saheli
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Prem Saheli
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स्वामी जु के प्रकट उत्सव के प्रथम दिन के होने वाले पद 👇🏻
🦚🪘🪕 प्रथम पद 🦚🪘🪕
स श्रृं पेज- 15
ऐसी रितु सदा सर्वदा जो रहे बोलत मोरनि ।
नीके बादर नीके धनुष चहुँ दिसि नीकौ श्रीवृन्दावन आछी नीकी मेघनि की घोरनि ।।
आछी नीकी भूमि हरी हरी आछी नीकी
बूढ़नि की रेंगनि काँम किरोरनि।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कैं मिलि गावत
राग मल्हार जम्यौ री किसोर किसोरनि ।।१ ।।
🦚🪘🪕 द्वितीय पद 🦚🪘🪕
स श्रृं पेज- 15
श्रीवृन्दाबन कौ री चोज मनोज बढ़त रहै।
कुंजनि कुंजनि केलि नवेलि नवल कहैं।।
कहें नवल नवेलि केलि सुनि सखी सुख पावहीं।
मन्द मन्द मधुर मिलै सुर सरस गीतहिं गावहीं । १ ।।
प्रथम प्रिया आराधि साधि सब पाइयै।
प्रीतम अति अवलम्ब सु रसिक रिझाइयै ।।
रिझाइ अति अवलम्ब प्रीतम फूल तन मन में बढ़े।
नेम गहि निर्वाहि यह रस प्रेम प्यारी को पढ़े ।।२।।
रहसि बहसि बदी होड़ परस्पर मन हरें।
रसही रस उपजाइ उमँगि अंग अंग ढरें।।
ढरहिं रंग उमँगि रंगीले जिहिं अंग परनि परें।
निपुन नागर नवल दोऊ हरषि हँसि अंकौं भरें ।।३।।
बहुरि कुँवरि करि रोड़ कोड़ के चाड़िले। हारी होड़ न देत लेत लटि लाड़िले ।।
लटि लेत परस न देति अपनौं अंग अति नव नागरी।
कोक कुसल किसोर बरबस किये कुँवरि अचागरी ।।४।।
अति आसक्त दुहूँ दिसि रिसहिं नसावहीं।
अति आनन्द सुधाधर पीवत पिवावहीं ।।
पिवाय अधर सुधा महा मधु मत्त मिलि कौतिक कियौ ।
किये कौ सुख अल्प सखि सुनि कह्यौ भरि उमॅग्यौ हियौ ।।५।।
दम्पति सम्पति सहित सबै सुख पूजहीं।
नखसिख कौतिक रासि विलसि कल कूजहीं ।।
कूजि कलकंठी कृसोदरि स्याम स्रवन सुहावनी। वारि पिय सुकुमारि पर मनु देत रीझि रिझावनी ।। ६ ।।
रीझि रहे सिरमौर और उबटी सबै ।
तरुनि तरंग अनंग अंग लपटी जबै ।।
लपटि स्याम तमाल बाला बेलि कोमल लौ लई।
हासि कुसुम उदित उरोजनि नेह नाजुक नित नई ।।७।।
निजु रस रीति प्रतीति बिपिन बसि तौ लहै। रसिक अनन्य नृपति कौ संग समझि गहै ।।
गह्यौ संग अनन्य नृपति कौ रंग लाग्यौ जब हियें।
भये साधन सिद्ध तिनकैं तिहिं छिन अनहीं कियें ।।८।।
नित्य बिहार अधार श्रीहरिदासी दियौ।
बिपुल बिनोदनि देखि सु जनम सुफल कियौ ।।
कियौ जनम सुफल सु अपनों और प्रानी जे सुनें।
संग मिलि श्रद्धा बढ़े सुख दुर्लभ ब्रजजुवती जनैं ।।९।।
श्रीस्याँमा को आधार राजरस तौ कह्यौ।
सब रस कौ रस सार बिहार बिसद गह्यौ ।।
गह्यौ विसद विहार अपनौं जानि निजु कीनी मया।
जै श्रीबरविहारिनिदासि सुखनिधि दुलहिनी की दिन दया ।।१०।।