Video-29: रीतिकाल के प्रमुख भेद | रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त कवियों का तुलनात्मक अध्ययन |
DrNP Prajapati l Hindi Sahitya
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Video-29: रीतिकाल के प्रमुख भेद | रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त कवियों का तुलनात्मक अध्ययन |
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हिंदी साहित्य की इस विशेष व्याख्यान श्रृंखला में आज हम रीतिकाल के तीन प्रमुख स्तंभों—रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त काव्यधाराओं का विस्तृत और प्रामाणिक तुलनात्मक अध्ययन करेंगे।
इस व्याख्यान में प्रमुख बिंदु:
• रीतिकाल का वर्गीकरण एवं 'रीति' का वास्तविक अर्थ
• रीतिबद्ध काव्यधारा: लक्षण-ग्रंथ परंपरा एवं प्रमुख कवि (केशवदास, चिंतामणि, मतिराम, देव)
• रीतिसिद्ध काव्यधारा: बिहारीलाल और बिहारी सतसई का वैशिष्ट्य
• रीतिमुक्त काव्यधारा: स्वच्छंद प्रेम की पीर और कवि (घनानंद, बोधा, आलम, ठाकुर)
• तुलनात्मक सारणी: काव्य-उद्देश्य, शृंगार निरूपण, भाषा-शिल्प और प्रमुख अंतर
• आचार्य रामचंद्र शुक्ल एवं डॉ. नगेंद्र के महत्वपूर्ण परीक्षा-उपयोगी कथन
यह कक्षा UGC NET / JRF (Paper 2 Hindi), सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor), PGT, TGT, SET तथा विश्वविद्यालयी परीक्षाओं (BA / MA) के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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