Shri Yamunaji ke 41 Pad 17-20, શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ 17-20, श्री यमुनाजी के ४१ पद 17-20,
SUR SAGAR
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Shri Yamunaji ke 41 Pad 17-20, - શ્રી યમુનાજી ના 41 પદ, - पुष्टिमार्ग कीर्तन,Haveli Sangeet, Kirtans, Bhajans, Shotras, Mantras, Pushtimarg Kirtan, Ashtachap, Bhagwati Prasad Ghandarva, Pushtimarg, Pushtimargiye Sangeet, SUR SAGAR, KIRTANKAR: Pt. BHAGWATI PRASAD
Kirtans by: Bhagwati Prasad
00:00 पद 17 - भक्त पर करी कृपा श्रीयमुनेजु ऐसी
5:05 पद 18 - नेह कारण श्रीयमुने प्रथम आईं
11:00 पद 19 - ताते श्रीयमुने यमुनेजु गावो
16:09 पद 20 - भाग्य सौभाग्य श्रीयमुनेजु देई
पद संख्या 17
भक्त पर करि कृपा श्री यमुने जु ऐसी, छान्ड निज धाम विश्राम भुतल कियो;
प्रकट लीला दिखाई जु तैसी.
परम परमारथ करत है सबनको, देत अद्भुत रुप आप जैसी;
' नंददास' यो जानी द्रढ करी चरण ग्रहे, एक रसना कहा कहे विसेशी.
पद संख्या 18
नेह कारण श्री यमुने जु प्रथम आयी, भक्त के चित्त कि व्रुत्ति सब जानके;
तहांते अतिही आतुर जु धाई.
जाके मन जैसी इच्छा हति ताहीकि, तैसीही आय साध जु पूजाई,
'नंददास"ता पर प्रभु रीझि रहे , जोई श्री यमुनाजी को जश जु गायी.
पद संख्या 19
तांते श्री यमुने यमुने जु गाओ, शेष सहस्त्रमुख निश दिन गावत;
पार नही पावत ताही पाओ.
सकल सुख देनहार तांते करो उच्चार, कहत वारंवार जिन भुलाओ;
'नंददास' कि आस श्री यमुने पुरन करी, तांते घरी घरी चित्त लाओ.
पद संख्या 20
भाग्य सौभाग्य श्री यमुने जु देई, बात लौकीक तजो, पुष्टि , यामुने भजो;
लाल गिरिधरनवर तब मिलेई.
भग्वदिय संग कर बात इनकी लहे, सदा सानिध्य रहे केलि मेई;
'नंददास ' जा पर कृपा श्री वल्लभ करे, ताके श्री यमुने सदा जु हेई.
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