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पर्दा (Parda) | Sad Rajasthani Folk Song | Gauri Bano, Ajmer | Pranay Chouhan Music

Pranay Chouhan Music

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पर्दा (Parda) | Sad Rajasthani Folk Song | Gauri Bano, Ajmer | Pranay Chouhan Music

700 просмотров · 6 дн. назад
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पर्दा (Parda) — एक दर्द भरा राजस्थानी लोकगीत From the heart of Ajmer, Rajasthan, comes the imagined story of Gauri Bano — a woman whose face the world sees covered, but whose heart holds countless untold stories. Behind every ghunghat is a person. Behind every silence, a voice. And behind every tradition, a woman with her own dreams. “पर्दा” is a soulful, melancholic Rajasthani folk song about hidden identities, unspoken pain, and the longing to live beyond the veil. Through the voice of an imagined woman, this song reflects on the difference between a veil worn by choice and one imposed by society. सबने देख्यो घूँघट म्हारो, म्हाने कुण देख्यो रे? Everyone saw my veil, but who ever saw me? Lyrics - ओ... म्हारी मायड़... थूं तो कहती थी... म्हारो घर भी आसी... म्हारो आँगण भी आसी... फेर म्हारो अंबर... कठै खो गयो रे... [मुखड़ा – धीमा, गहरा राजस्थानी लोक स्वर] पर्दो म्हारे मुखड़ै रो, पर्दो म्हारी बात... घूँघट री ओट में बीत गई, म्हारी सारी रात... ओ जी म्हारा पर्दा रे... कुण जाणे म्हारो हाल? घर-घर री लाज बचाती रही, खुद रो ही गुमायो ख्याल... [अंतरा 1 – धीमी ढोलक, सारंगी] बाबुल री देहरी छूटी, गुड़िया रह गई द्वार... पीहर री गलियाँ सपना बनगी, बदली जीवन री धार... सासर आई लाल चुनरिया, सबने दी सीख समझाय... नैण झुकावै, बोल घणो मत, इज्जत यूँ ही निभाय... [मुखड़ा – दर्द भरी पुनरावृत्ति] पर्दो म्हारे मुखड़ै रो, पर्दो म्हारी बात... घूँघट री ओट में बीत गई, म्हारी सारी रात... [वाद्य संगीत – सारंगी का लंबा आलाप] [धीमी मुरचंग, बिना ताल के कुछ क्षण] [अंतरा 2 – और भी धीमा, लगभग फुसफुसाहट] चूल्हे री आँच में दिन बीत्या, रोटी संग अरमान... सब री थाळी भरती-भरती, भूखी रह गई जान... बेटी पूछे, “माँ री माँ, थारो सपना काई?” हँसती-हँसती चुप हो जाऊँ, कहणो आवे ना काई... [ब्रिज – केवल स्त्री स्वर और तानपुरा] म्हाने चाँद देखणो थो, बिन ओट री रात... म्हाने हाट-बजारां जावणो थो, खुद करणी थी बात... घूँघट म्हारी पसंद हुवे, तो म्हारो सिंगार... जबरन ओढ़ाई चुनरी नै, क्यूँ कहवो सत्कार? [अंतरा 3 – वृद्ध आवाज़, जीवन का पछतावा] अब तो केसां में चाँदी उतरी, हाथां पड़गी लकीर... कितने सावण बीत गया रे, कितनी दबगी पीर... म्हारा नाम री जगह हमेशा, किसी री बहू कहाय... म्हारी अपनी पहचान नै, कुण याद करसी माय? [अंतिम मुखड़ा – स्त्री मंडली बहुत धीमे जुड़ती है] पर्दो म्हारे मुखड़ै रो, पर्दो म्हारी बात... घूँघट री ओट में बीत गई, म्हारी सारी रात... ओ जी म्हारा पर्दा रे... एक सवाल छोड़ जाऊँ... सबने देख्यो घूँघट म्हारो, म्हाने कुण देख्यो रे? [OUTRO – अकेली सारंगी, लंबा विरह आलाप] म्हाने कुण देख्यो रे... म्हाने कुण जाण्यो रे... ओ... म्हारी मायड़... म्हारो भी इक नाम हुवो... म्हारो भी इक नाम... 🎵 Song: पर्दा (Parda) 📍 Story setting: Ajmer, Rajasthan 👩 Featured : Gauri Bano 🎶 Genre: Sad Rajasthani Folk / Marwari Folk 🎤 Presented by: Pranay Chouhan Music If this song touches your heart, please like, share, and subscribe to Pranay Chouhan Music for more original Indian folk music and heartfelt musical stories. #Parda #RajasthaniFolk #PranayChouhanMusic