जब भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को यहां भेजा | matarani | kokila mata temple | navratri special
Bhriguraj Singh Mehra
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Bhriguraj Singh Mehra
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जब भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को यहां भेजा | matarani | kokila mata temple | navratri special
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माता कोकिला का इतिहास
देवी भगवती को समर्पित यह मंदिर पिथौरागढ़ जनपद में प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है चौकोरी के करीब कोर्टमन्य मार्ग से 17 किलोमीटर की दूरी पर कोटगाड़ी नाम के एक गांव में स्थित है कोटगाड़ी देवी की स्थापना के बारे में माना जाता है कि यहां पर इनकी स्थापना सदियों पूर्व स्थानीय व्यक्ति को स्वपन देवी के द्वारा व्यक्त की गई इच्छा के अनुसार की गई थी मां कोकिला की मूर्ति को ढक कर रखा जाता है
मां के मंदिर से नीचे भूगर्भ से जल निकलता है इस स्त्रोत का जल कभी भी नहीं घटता है इस जल को गंगाजल जैसी मान्यता मिली है लोग इस धारा से जल अपने घरों को ले जाते हैं पिथौरागढ़ में स्थित मां कोकिला के मंदिर को न्याय के मंदिर के रूप में जाना जाता है लोग आपसी विवाद लड़ाई झगड़े के मामले में न्यायालय में जाने के बजाय मां के दरबार में ले जाना पसंद करते हैं मंदिर में सादे कागज में चिट्ठी लिखकर न्याय की गुहार लगाई जाती है
मां कोकिला के मंदिर का रहस्य
उत्तराखंड के सभी देवता विधि के विधान के अनुसार खुद को न्याय देने और फल प्रदान करने में असमर्थ मानते हैं और उनकी अधिकार परिधि शिव तत्व में विलीन हो जाती है तब कोटगाड़ी देवी की पूरे ब्रह्मांड में स्तुति होती है संसार में भटका मानव जब है निराशा से गिर जाता है और हर ओर से अन्याय का शिकार हो जाता है तो संकल्प पूर्वक कोर्ट गाड़ी की देवी का जिस स्थान से भी सच्चे मन से समरण करता है वहीं से उसके निराशा के बादल हटने शुरू हो जाते हैं
उसकी मान्यता के संकल्प पूरा होने के बाद देवी माता कोटगाड़ी के दर्शन की महत्वता अनिवार्य है इस मंदिर में श्री यादव के असंख्य पत्थर न्याय की गुहार के लिए लगे रहते हैं दूर-दराज से श्रद्धालु जन डाक द्वारा भी मंदिर के नाम पर पत्र भेजकर अपनी मन्नतें मांगते हैं माता के बारे में मान्यता है कि वह यहां आए बिना भी पुकार सुन लेती है और कड़ा न्याय करती है इसी कारण माता पर न केवल लोगों का अटूट विश्वास वरुण उनसे डर भी रहता है
कुमाऊं मंडल में अनेक गांवों के लोगों ने कोकिला माता के नाम पर इस भय मिश्रित श्रद्धा का सदुपयोग वनों और पर्यावरण को बचाने के लिए भी किया है गांवो के पास के वनों को माता को चढ़ा दिया गया जिसके बाद से कोई भी इन वनों से एक पौधा भी काटने हिम्मत नहीं करता है कोटगारी मंदिर के पास अनेक जल धाराएं हैं जिनसे सर्दियों में गर्म और गर्मियों में गर्म पानी आता है और हर मौसम में इनसे बिना परेशान हुए स्नान किया जा सकता है कहा जाता है कि प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में माता कोकिला इन्हीं जल धाराओं में स्नान करने आती है अनेक सच्चे श्रद्धालुओं को अक्सर इस समय माता के वाहन शेर के दर्शन होते हैं कुंड में अनेक बार नागों के दर्शन भी होते हैं..
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