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Osla Village||sankri ||Swargarohini ||ओसला गांव||जहां से पांडव स्वर्ग गए थे || love marriage का गांव

Harry negi

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Osla Village||sankri ||Swargarohini ||ओसला गांव||जहां से पांडव स्वर्ग गए थे || love marriage का गांव

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Harry negi
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ओसला गांव के कुछ यादगार पल जल्द ही आपके सामने ऐतिहासिक एवं रोचक तथ्यों से भरी इस गांव की वीडियो आपके सामने रखूगा एक ऐसा गांव जहां फोन किसी काम नहीं आता क्योंकि वहां कोई नेटवर्क नहीं है केवल गांव के शीर्ष में एक सेटेलाइट फोन है इमरजेंसी के लिए इस गांव में जाने के लिए वन विभाग की परमिशन और एक गाइड बेहद जरूरी है निःसंदेह मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि वास्तविक भारत का अनुभव यहां के विभिन्न गांवों में जाकर ही किया जा सकता है। उत्तराखंड के रवाईं क्षेत्र में एक दूरस्थ गाँव है - ओसला. इस गाँव के साथ कई मिथक जुड़े हैं. इसमें कुछ हक़ीक़त है और कुछ फ़साने. यहां दुर्योधन का एक मंदिर है और कहा जाता है कि यहां पांडवों की नहीं बल्कि कौरवों की पूजा होती है. कुछ लोग इस गाँव को 'प्रेम विवाहों' का गाँव कहते हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि यहां 'भाग कर शादी करने' की परम्परा है. सच्चाई क्या है कितना मिथक है इसके लिए मेरी आने वाली वीडियो यूट्यूब चैनल पर जरूर देखें भारत की प्रामाणिकता का अनुभव करने के इच्छुक यात्रियों को इसके प्राचीन गांवों का दौरा करना चाहिए जो आज भी सदियों पुरानी संस्कृति और परंपराओं की झलक देते हैं। उत्तराखंड भले ही “देवभूमि” हो लेकिन उत्तराखंड में एक ऐसी जगह भी है जहां का राजा गांधारी का पुत्र दुर्योधन हुआ करता था और आज भी वहाँ के लोग उसकी पूजा करते हैं। आज हम आपको इस लेख में उसी एक जगह के बारे में बताएँगे जहां न सिर्फ दुर्योधन की पूजा होती है बल्कि उसे देवता का दर्जा प्राप्त है। कहा जाता है कि जब महाभारत के युद्ध में दुर्योधन की मृत्यु हुई तो पूरा गांव शोक में डूब गया और गांव के लोग इतना रोए कि उस स्थान पर उनके आंसुओं से एक नदी बन गयी जिसे तमसा नाम दिया गया। वो तमसा नदी आज भी वहाँ मौजूद है और अब उसे टोन्स नदी के नाम से जाना जाता है। यहाँ ओसला नामक एक गाँव की कहानी है जो उत्तराखंड में हर की दून ट्रेक के रास्ते में आता है। ओसला की कहानी जब भी आप हर की दून घाटी के बारे में पढ़ते हैं तो महाभारत की पौराणिक कथाओं के बारे में पढ़ते हैं। हर की दून का शाब्दिक अर्थ है देवताओं की घाटी (दून) या शिव (हर)। कहानी यह है कि एक कबीला था जो ओसला गाँव में रहने वाले कौरवों (दुर्योधन) के प्रति वफादार था । वे दुर्योधन के प्रति इतने निष्ठावान थे कि उन्होंने उसके लिए एक मंदिर बनवाया और आज तक वे दुर्योधन का उपदेश करते हैं ओसला में किसी अन्य भगवान का नहीं। गाँव के अपने नियम और कानून हैं, जिसकी अपनी सरकार है। वहां के लोग अभी भी एक खास तरीके से तैयार होते हैं और उनकी पोशाक स्पष्ट रूप से उनकी संस्कृति और परंपराओं को दर्शाती है। उनके पास एक राजा है जो महीने में एक बार गांव का दौरा करता है और वह तब होता है जब पूरे गांव के लिए मुख्य पूजा (प्रार्थना) की जाती है। लगभग 600 निवासियों वाले गाँव में कुल 250 घर हैं। हर घर में गाय और बकरियाँ हैं जो उनके दूध का प्रमुख स्रोत हैं। ग्रामीणों के पास आलू और गेहूं के खेत हैं, जो उनके भोजन और आय का स्रोत हैं। ओसला कैसे पहुँचे ओसला के लिए आपको हर की दून घाटी (उत्तराखंड के उत्तरकाशी डिस्ट्रिक्ट रवॉई घाटी में) में एक ट्रेक की योजना बनानी होगी जिसके लिए आप सांकरी नामक गांव से शुरू करेंगे जो ट्रेक के लिए आधार शिविर है। तालुका नामक एक अन्य गांव से 15 किमी की ट्रेकिंग के बाद आप पहले दिन ओसला पहुंचेंगे (सनरी से तालुका तक एक सड़क है)। जब आप हर की दून ट्रेक कर रहे हों तो ओसला की यात्रा अवश्य करें। यदि आप वास्तव में पहले दिन थके हुए हैं, तो आप यहां एक पड़ाव भी बना सकते हैं और वहां एक होम स्टे में आराम कर सकते हैं और फिर ट्रेक जारी रख सकते हैं, ग्रामीण आपको न्यूनतम शुल्क के साथ अपने मेहमानों की मेजबानी करने में बहुत खुश होंगे। मैं ओसला के अपने अनुभव को शब्दों में नहीं बल्कि तस्वीरों में बयां करना चाहूंगा। हालांकि की अब की युवा पीढ़ी और वहां पर रहने वाले लोग दुर्योधन से जुड़े तथ्यों को नकारते हैं और कहते हैं सोमेश्वर भगवान का मंदिर है कैमरे के सामने कोई भी इन तथ्यों को नहीं रखना चाहता लेकिन पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर और भी कई अन्य लेखों में इस चीज का जिक्र मिलता है #villagetour #uttarakhand #villagelife #oslavillage