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ईशावास्य उपनिषद मंत्र 15 | हिरण्मयेन पात्रेण | सत्य के स्वर्णमय आवरण को हटाने की प्रार्थना |

Atma Jyoti

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ईशावास्य उपनिषद मंत्र 15 | हिरण्मयेन पात्रेण | सत्य के स्वर्णमय आवरण को हटाने की प्रार्थना |

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Atma Jyoti
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ईशावास्य उपनिषद का 15वाँ मंत्र हमें सत्य और परमात्मा के दिव्य स्वरूप का ज्ञान कराता है। मंत्र: हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्। तत् त्वं पूषन्नपावृणु सत्यधर्माय दृष्टये॥ अर्थ: हे प्रभु! सत्य का मुख स्वर्णमय पात्र से ढका हुआ है। कृपया उस आवरण को हटाइए, ताकि मैं सत्य के वास्तविक स्वरूप का दर्शन कर सकूँ। इस मंत्र के माध्यम से जानिए आत्मज्ञान, सत्य और परमात्मा के दिव्य स्वरूप का गहरा रहस्य। वीडियो पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE जरूर करें।