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जानिए कैसे होंगे आपके कर्म फलीभूत | जब कर्म उत्कृष्ट हो तो सफलता सिर्फ औपचारिकता मात्र रह जाती है.।

Ziddi Ramishvar

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जानिए कैसे होंगे आपके कर्म फलीभूत | जब कर्म उत्कृष्ट हो तो सफलता सिर्फ औपचारिकता मात्र रह जाती है.।

6 просмотров · 2 недели назад
Ziddi Ramishvar
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जानिए कैसे होंगे आपके कर्म फलीभूत | जब कर्म उत्कृष्ट हो तो सफलता सिर्फ औपचारिकता मात्र रह जाती है.। Your Queries: thanks for watching 👏 ❣️ maa जानिए क्यों नहीं होते आपके कर्म फलीभूत पने गौर किया होगा कि एक आ अच्छा गायक वही होता है, जो भाव के साथ गाता है। बिना भाव के कोई कितनी ही अच्छी आवाज में और सुर मिला कर गाए, उसका गाना आत्मा को नहीं छू पाता। कोई अभिनेता अगर भाव के साथ डायलॉग नहीं बोलता, तो वह दृश्य दिल में नहीं उतर पाता। अपना बचपन याद करें और अपनी पीठ पर मां की थपकियां भी याद करें। उन थपकियों में ऐसा क्या जादू था कि आप खुद को महफूज समझते थे। चंद ही क्षणों में आपको नींद आ जाती थी। मां का स्पर्श हमें इतना मीठा इसीलिए लगता है, क्योंकि वह भावना से पगा होता है। एक औरत जो मां नहीं है और पैसा कमाने के लिए बच्चे की देखभाल कर रही है, वह जब पीठ पर थपकियां देगी, तो वे बच्चे को निर्मम चपत जैसे लगेंगे और उनसे नींद तो क्या ही आएगी, आती हुई नींद भी उजड़ जाएगी। समझने की बात यह है कि कर्म से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पीछे का भाव होता है। जब आप किसी बुजुर्ग के पैर छूते हैं, तो पैर छूना कर्म है, लेकिन उस कर्म से आपको जो शांति मिल सकती है, वह आपकी भावना पर निर्भर करती है। आप जब किसी के प्रति श्रद्धा से भरकर पैर छूते हैं, तो यह कर्म आपको सुकून देता है। लेकिन अगर दूसरों को दिखाने भर के लिए ऐसा करते हैं, तो वह कर्म अकर्म बन जाता है, क्योंकि उसका आप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। कर्म अगर शरीर है, तो भावना उसकी आत्मा। प्राणशक्ति के लिए भावना बहुत जरूरी है। इसीलिए जीवन में कोई भी काम करते हुए अपने मन की भावना को लेकर सचेत रहें। हर कर्म को उसके लिए जरूरी भावना के साथ करें। ऐसा करने पर ही आपका वह कर्म फलीभूत भी होगा। बहुत से लोग शिकायत करते हैं कि उन्होंने बहुत मेहनत की, किसी काम को करने के लिए जरूरी सबकुछ किया, पर उन्हें सफलता नहीं मिली। ऐसे लोगों से सिर्फ एक ही बात पूछी जानी चाहिए। काम करते हुए तुम्हारे मन में भाव क्या था? मैं बहुत लोगों को जिम में वर्कआउट करते हुए देखता हूं। वे मशीन की तरह जिम की मशीनों को चलाते हैं। वे सालों से ऐसा करते आ रहे हैं, पर शरीर है कि भिंडी का भिंडी ही बना हुआ है। उसमें मांसपेशियां दिखने को नहीं आतीं। जब तक भाव के साथ, पूरी सजगता के साथ और परिणाम को नजर में भरकर काम नहीं किया जाएगा, सफलता हमसे कतराती ही रहेगी। कर्म और भावना को थोड़ा और बेहतर समझने के लिए कुछ और उदाहरण दिए जा सकते हैं। मीरा ने कृष्ण के प्रेम में नृत्य किया। नृत्य एक कर्म था। कृष्ण के प्रति मीरा का प्रेम और श्रद्धा भावना थी। भावना ने ही मीरा के नृत्य को अलौकिक बनाया। परमवीर चक्र से सम्मानित सिपाही अब्दुल हमीद ने 1965 के भारत-पाक युद्ध में अकेले ही दुश्मन के कई टैंक उड़ा दिए। टैंक उड़ाना एक कर्म था, पर उसके पीछे हर हाल पर अपनी मातृभूमि की रक्षा करने की भावना थी। उस भावना के चलते ही बहादुरी का जज्बा पैदा हुआ और अब्दुल हमीद ने उस जज्बे में मौत की भी परवाह नहीं की। कर्म और भावना के मिलने पर ही असली शक्ति का जन्म होता है। इसीलिए अपने हर काम को भाव से आलोड़ित करना बहुत जरूरी है। कर्म दीये की बाती की तरह है। बाती के जलने से होने वाली रोशनी का फल तभी मिलेगा, जबकि हम उसमें भाव का घी भी डालें। जब कर्म भावना से भीगा रहता है, तो वह अलौकिक प्रकाश देता है। चैतन्य महाप्रभु के मन में कृष्ण की भक्ति की भावना थी। सुदामा के मन में कृष्ण की दोस्ती की भावना थी। किसी खिलाड़ी से पूछें कि फुटबॉल का खेल तो वही होता है, पर जब वह ओलिंपिक जैसी प्रतिस्पर्धा में अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहा होता है, तब उसके पैरों में कहां से बिजली उतर आती है? खिलाड़ी आपको बताएगा कि ओलिंपिक के मैच में राष्ट्रभक्ति का एक खास जज्बा मन में समाया होता है, जो खेल के कर्म को कई गुना उत्कृष्ट बना देता है। इसलिए अगर किसी काम में सफलता न मिलती हो, तो भाग्य की बजाय अपने कर्म की जांच करें और कर्म की जांच करने से पहले अपने भाव की जांच करें कि कर्म किस भाव से किया। भाव की उत्कृष्टता कर्म को भी उत्कृष्ट बनाती है और जब कर्म उत्कृष्ट हो, तो सफलता सिर्फ औपचारिकता मात्र रह जाती है। #Ziddi Ramishvar