ॐ नमः शिवाय
S.R. Funny Comedy Entertainment
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ॐ नमः शिवाय
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एक बार देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ। मंथन के दौरान अनेक दिव्य रत्न निकले, लेकिन साथ ही अत्यंत भयानक और तीव्र 'हलाहल' विष भी प्रकट हुआ। उस विष की ज्वाला इतनी भयंकर थी कि तीनों लोकों में हाहाकार मच गया और कोई भी उसका ताप सहन नहीं कर सका।
जब संसार के विनाश का संकट मंडराने लगा, तब सभी देव और दानव भगवान शिव की शरण में पहुँचे और रक्षा की गुहार लगाई।
भगवान शिव अत्यंत दयालु और निष्पाप हैं—इसीलिए उन्हें 'भोलेनाथ' कहा जाता है। उन्होंने बिना किसी झिझक के पूरे संसार के कल्याण के लिए वह सारा विष स्वयं पी लिया। माता पार्वती ने विष को उनके शरीर में फैलने से रोकने के लिए उनके गले को रोक दिया, जिससे विष उनके कंठ में ही ठहर गया। विष के प्रभाव से उनका गला नीला हो गया, और उसी दिन से वे 'नीलकंठ' कहलाए।