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Vikash Parihar
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Vikash Parihar
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( जय मां गजानन)
हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
ना डरे किसी साले से,ना डरे किसी साले से.
अरे हम क्षत्रिय वीर खंगार ना डरे किसी साले से.
श्री कृष्ण के वंशज है हम ,ना पड़े किसी से भी कम(2)
कुल की देवी गजानन मात,ना डरे किसी साले से.
अरे हम क्षत्रिय----- ना साले से.
मारी चंद्रवंशी शाखा है,सदा ऊंचा ध्वज रखा है.(2)
रण में रणकौशल दिखलाए,ना दवे किसी साले से.
अरे हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
म्हारे खेत सिंह भए राजा,जूनागढ़ में डंका बाजा.(2)
रखे किलो 62 की तलवार,ना डरे किसी साले से.
रे हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
यह शेर को चीर दिखाए,पृथ्वी भी अचरज खाए.(2)
''सिंह''की पदवी नाम कराएं,ना डरे किसी साले से.
रे हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
संग चौहान के दिल्ली आए,अपनी पहचान बनाए.(2)
सामंत बन गए खेत खंगार,ना डरे किसी साले से.
रे हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
तारागढ़ में हुआ स्वयंबर,जो काटे सिला बने बर.(2)
भारी वीर वहां पर आए,पर जीत न सके स्वयंबर.
रे हमें क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
सब हार के थके हुए थे,तब खेता खड़े हुए थे.(2)
यह सिला को काट गिराए ना,डरे किसी साले से.
रे हम क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
थी बो हाड़ी राजकुमारी,गई खेत सिंह पर वारी.(2)
दीनी वरमाला पहनाए,ना डरे किसी साले से.
अरे हमें क्षत्रिय वीर खंगार,ना डरे किसी साले से.
कई युद्ध इन्होंने जीते,फिर मुड़ के ना देखा पीछे.(2)
राजधानी कुंडार बनाए,ना डरे किसी साले से.
पहला हिंदू राष्ट्र बनाए,ना डरे किसी साले से.
मैं सूमरू मात गजानन,भक्ति में लगा रहे मन.
मेरा खुश रहे वंश खंगार,ना डरे किसी साले से.
विकास परिहार गाथा गा रहे. दीपक सिंह कलम चला रहे.
अक्कू,भंवरसिंह सिंह हैं साथ ना डरे किसी साले से.
भैया रामकुमार हैं साथ ना डरे किसी साले से.
अरे हम क्षत्रिय वीर खंगार ना डरे किसी साले से.