मानुष हौं तो वही रसखानि ❤️ | श्री कृष्ण भजन | रसखान जी की रचना | प्रभु प्रेम धुन
Prabhu Prem Dhun
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मानुष हौं तो वही रसखानि ❤️ | श्री कृष्ण भजन | रसखान जी की रचना | प्रभु प्रेम धुन
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Prabhu Prem Dhun
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🙏 राधे राधे 🙏
प्रस्तुत है महान कृष्ण भक्त कवि श्री रसखान जी की अमर ब्रज रचना —
"मानुष हौं तो वही रसखानि..."
इस अद्भुत रचना में रसखान जी ने श्री कृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अपना अनन्य प्रेम व्यक्त किया है। उनकी कामना है कि यदि मनुष्य जन्म मिले तो ब्रज गोकुल में मिले, यदि पशु बनें तो नंद बाबा की गायों में और यदि पत्थर बनें तो गोवर्धन पर्वत का हिस्सा बनें।
यह भजन श्री कृष्ण के चरणों और ब्रजधाम के प्रति प्रेम की एक भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति है।
🌸 मूल रचनाकार: श्री रसखान जी
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प्रभु प्रेम धुन — भक्ति संगीत की एक छोटी-सी भेंट।