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आपके लिए - वेदान्त महावाक्य विचार पर प्रवचन - 18

Swami Akhandanand Saraswati By Anand Prastuti

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आपके लिए - वेदान्त महावाक्य विचार पर प्रवचन - 18

1 000 просмотров · Трансляция закончилась 2 дня назад
Swami Akhandanand Saraswati By Anand Prastuti
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वक्ता - श्रद्धेय स्वामी श्री विश्वात्मानंद सरस्वती, विषय: वेदांत महावाक्य विचार पर प्रवचन https://youtube.com/live/BucIci1eJSc इस प्रवचन में स्वामी श्री विश्वात्मानंद सरस्वती जी ने वेदान्त महावाक्य 'तत्त्वमसि' पर चर्चा की है। आज के सत्र की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: 1. विदेह मोक्ष और मृत्यु: प्रवचन में ज्ञानी और अज्ञानी पुरुष की मृत्यु के समय की स्थिति पर चर्चा की गई है (3:17-5:44)। एक ज्ञानी पुरुष शरीर छूटते ही 'पर देवता' (सृष्टि के नियामक) में लीन हो जाता है और मुक्त हो जाता है, जबकि अज्ञानी के मन में शेष बची वासनाएं उसे पुनर्जन्म के चक्र में डाल देती हैं (5:54-7:35)। 2. संकल्प का महत्व (7:47-8:15) : यह स्पष्ट किया गया है कि अज्ञान और ज्ञानी दोनों के प्राण शरीर से समान रूप से निकलते हैं, लेकिन फल में भेद उनके 'संकल्प' के कारण आता है। 3. परस मुद्रा (फरसा) का दृष्टांत: वक्ता ने एक पुराने दृष्टांत के माध्यम से समझाया कि कैसे सच और झूठ का निर्णय होता है (11:24-14:35)। जिसका अंतःकरण शुद्ध है, वह ज्ञानी है और विदेह मोक्ष का अधिकारी है। प्राणों का उत्क्रमण: श्रुति के अनुसार, ज्ञानी पुरुष के प्राणों का उत्क्रमण (शरीर से निकलना) उस प्रकार नहीं होता जैसा सामान्य जीव का होता है; वे ब्रह्म में विलीन हो जाते हैं (15:39-19:59)। 4. सतत अभ्यास (साधना): स्वामी जी ने जोर दिया कि वेदान्त केवल सुनने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह निरंतर अभ्यास और मनन की प्रक्रिया है (27:05-28:36)। जब तक पूर्ण बोध न हो जाए, तब तक गुरु के साथ सत्संग और शास्त्रों का चिंतन आवश्यक है (29:53-30:29)। #swamiakhandanandsaraswati #anandprastuti #vedantmahavakyavichar #anandvrindavanashram