समा कौर ने ठुकराया कौला पूजन! फिर गठवाला, हुड्डा....खाप ने कलानौर के नवाब के खिलाफ लिया बड़ा फैसला!
Gramin Bharat (ग्रामीण भारत)
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समा कौर ने ठुकराया कौला पूजन! फिर गठवाला, हुड्डा....खाप ने कलानौर के नवाब के खिलाफ लिया बड़ा फैसला!
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इस वीडियो में चर्चा है हरियाणा के लोकइतिहास में प्रचलित समा कौर और कौला पूजन से जुड़ी उस कहानी की, जिसे सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ एक साहसी महिला के विद्रोह के रूप में याद किया जाता है।
लोकमान्यता के अनुसार, डबरपुर, सोनीपत की बेटी समा कौर की शादी अलावत गोत्र के परिवार में हुई थी। विवाह के बाद उन्हें कथित तौर पर कौला पूजन से जुड़ी एक ऐसी परंपरा के बारे में जानकारी मिली, जिसमें नई नवेली दुल्हन को कलानौर के नवाब के यहां एक रात रुकना पड़ता था।
समा कौर ने इस परंपरा को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में किसी दूसरे व्यक्ति के घर जाकर नहीं रहेंगी।
इसके बाद वह अपने पिता के पास लौट आईं और परिवार से पंचायत बुलाने की बात कही। पंचायत में समा कौर ने अपनी पूरी बात रखी। बताया जाता है कि शुरुआत में परिवार के कुछ लोग नाराज हुए, लेकिन पंचायत में उनकी बात सुनने के बाद उनके पक्ष को उचित माना गया।
इसके बाद यह मामला मलिक खाप की पंचायत तक पहुंचा। आगे चलकर आसपास की अन्य खाप पंचायतों में भी इस कथित प्रथा को लेकर चर्चा हुई।
लोककथा के अनुसार, इसके बाद मलिक खाप और गठवाला खाप सहित आसपास के क्षेत्रों की खापें एकजुट हुईं और कलानौर के नवाब के खिलाफ संघर्ष का निर्णय लिया गया।
इस संघर्ष में दौला सांगवान के नाम का भी उल्लेख मिलता है। लोकमान्यता के अनुसार, उन्होंने इस लड़ाई में बहादुरी दिखाई और खापों के लोगों ने मिलकर नवाब के खिलाफ मुकाबला किया।
कहानी के अनुसार, संघर्ष के बाद नवाब का अंत हुआ और कौला पूजन की कथित कुप्रथा को समाप्त कर दिया गया।
इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष समा कौर का साहस है। एक नई नवेली दुल्हन द्वारा कथित सामाजिक परंपरा के सामने झुकने से इनकार करना और पंचायत के सामने अपनी बात मजबूती से रखना इस लोककथा का केंद्रीय विषय है।
इसी वजह से समा कौर को स्थानीय लोककथाओं में एक साहसी बेटी और सामाजिक कुप्रथा के खिलाफ आवाज उठाने वाली नायिका के रूप में याद किया जाता है।
हालांकि, इस पूरे प्रसंग के विवरण लोकमान्यताओं और स्थानीय रूप से प्रचलित ऐतिहासिक कथाओं पर आधारित बताए जाते हैं। ग्रामीण भारत इस कथा में बताए गए प्रत्येक ऐतिहासिक विवरण की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता।
वीडियो में जानिए—
👉 कौला पूजन की यह परंपरा क्या बताई जाती है?
👉 समा कौर ने इसका विरोध क्यों किया?
👉 मामला पंचायत से मलिक खाप और गठवाला खाप तक कैसे पहुंचा?
👉 कलानौर के नवाब के खिलाफ खापों ने क्या फैसला लिया?
👉 दौला सांगवान की भूमिका क्या बताई जाती है?
👉 और क्यों समा कौर की कहानी आज भी लोकस्मृति में जिंदा है?
ग्रामीण भारत पर देखिए हरियाणा के गांवों, खापों, लोकइतिहास और सामाजिक संघर्षों से जुड़े ऐसे ही अनसुने किस्सों की पड़ताल।