When Netaji met Bhagat Singh - “जब नेताजी मिले भगत सिंह से — दो महान क्रांतिकारी विचारों की कहानी”
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भारत के स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल आंदोलनों, जेलों और संघर्षों का इतिहास नहीं है।
यह उन विचारों की कहानी भी है,
जिन्होंने करोड़ों भारतीयों के भीतर आज़ादी की इच्छा को एक आंदोलन में बदल दिया।
और इस कहानी में दो नाम ऐसे हैं—
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह…
और
नेताजी सुभाष चंद्र बोस।
दोनों की कार्यशैली अलग थी।
दोनों की राजनीतिक यात्राएं अलग थीं।
लेकिन दोनों के भीतर एक बात बेहद मजबूत थी—
भारत को विदेशी शासन से मुक्त देखने की इच्छा।
भगत सिंह ने अपने विचारों और बलिदान से युवाओं को झकझोर दिया।
और सुभाष चंद्र बोस ने अपने संगठन, नेतृत्व और अदम्य इच्छाशक्ति से स्वतंत्रता के संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की।
लेकिन सवाल है—
क्या नेताजी और भगत सिंह कभी आमने-सामने आए थे?
और अगर आए थे, तो उस मुलाकात में क्या हुआ?
भगत सिंह की शहादत के बाद नेताजी ने उनके बारे में क्या कहा?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या भगत सिंह के विचारों और युवाओं में उनके प्रभाव ने नेताजी की सोच को भी प्रभावित किया?
आइए, इतिहास के उसी दौर में चलते हैं।