Ganapati Atharvshirsha 108 Times Fast | श्री गणपति अथर्वशीर्ष 108 Times | Ganesh Atharvashirsa
Daily Jap - 108 mantras
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Ganapati Atharvshirsha 108 Times Fast | श्री गणपति अथर्वशीर्ष 108 Times | Ganesh Atharvashirsa
श्री गणपति अथर्वशीर्ष (Ganpati Atharvashirsha)
बुद्धि व विद्या के दाता गणेश जी परमात्मा का विघ्ननाशक स्वरूप है। श्री गणेश के भक्त विभिन्न प्रकार से उनकी अनेक श्लोक, स्तोत्र, जाप द्वारा गणेशजी की आराधना करते हैं। इनमें से गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ भी बहुत मंगलकारी है।
प्रतिदिन प्रात: शुद्ध होकर इस पाठ करने से गणेशजी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है। यहां हम अर्थ सहित श्री गणपति अथर्वशीर्ष स्तोत्र को प्रस्तुत कर रहे हैं।
गणपति अथर्वशीर्ष पाठ विधि:
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ हमेशा आसन पर बैठ पूर्व, उत्तर या ईशान कोण की दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।
2. गणपति अथर्वशीर्ष पाठ से लाभ:
अथर्वशीर्ष स्तोत्र के पाठ से मनुष्य के जीवन में सर्वांगीण उन्नति होती है।
इसके पाठ से सभी प्रकार के विघ्न-बाधाएं दूर होती है।
व्यापार या नौकरी में उन्नति होती है।
आर्थिक समस्या दूर होने के साथ समृद्धि बढ़ती है।
विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आ रही रुकावटें दूर होती है।
विचारों से नकारात्मकता खत्म होती है और पवित्रता आती है।
गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस पाठ को अपने सामर्थ्य के अनुसार 108 या 1008 बार पढ़ने का संकल्प ले सकते हैं। जातक जिस भी प्रयोजन के लिए गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना चाहता है, उसका उल्लेख संकल्प में जरूर करना चाहिए।
अथर्ववेद के अनुसार जो भी भक्त अपनी आंखें बंद कर किसी भी समय अपने प्रभु को अपने समक्ष होने की कल्पना करते हुए इस स्तोत्र का जाप करता है, वह हर प्रकार के विघ्न से मुक्ति पाकर मोक्ष को प्राप्त करता है।
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