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(Pairahan-e-Mubarak)MOHAMMAD 11 Rabi al-MaghrabFrom 12 Rabi to Al Tak, live pilgrimage 2026

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(Pairahan-e-Mubarak)MOHAMMAD 11 Rabi al-MaghrabFrom 12 Rabi to Al Tak, live pilgrimage 2026

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खुल्लताबाद शरीफ (Khuldabad Sharif), जो कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) के पास स्थित है, सूफियों की पावन भूमि और 'वैली ऑफ सेंट्स' (संतों की घाटी) के रूप में पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। ​यहाँ स्थित हजरत ख्वाजा सैयद जैनुद्दीन शिराजी (रसु.) की दरगाह में इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का मुबारक लिबास (रोब/पेराहन) और ताज सुरक्षित रखा हुआ है। इस मुबारक तबर्रुक (पवित्र अवशेष) का इतिहास और इसका सिलसिला (वंश-क्रम/आध्यात्मिक श्रंखला) इस प्रकार है: ​1. मुबारक लिबास (Pairahan-e-Mubarak) और ताज का इतिहास ​तबर्रुक का संरक्षण: ख्वाजा जैनुद्दीन शिराजी की दरगाह के एक विशेष कक्ष में लकड़ी के संदूक (Box) के अंदर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब का मुबारक 'पेराहन' (पहनने का मुबारक कुर्ता/चोगा) और 'ताज' (टोपी) बेहद एहतराम के साथ महफूज रखा गया है। ​दक्कन आगमन: यह मुबारक तबर्रुक हजरत निजामुद्दीन औलिया (दिल्ली) के माध्यम से उनके खलीफा हजरत बुरहानुद्दीन गरीब (रसु.) को मिला था। जब बुरहानुद्दीन गरीब दिल्ली से दक्कन (खुल्लताबाद/दलताबाद) आए, तो वे इन पवित्र अमानतों को अपने साथ लेकर आए। ​खिलाफत की विरासत: हजरत बुरहानुद्दीन गरीब के विसाल (परलोक सिधारने) के बाद, ये पवित्र अवशेष उनके मुख्य उत्तराधिकारी और खलीफा हजरत ख्वाजा जैनुद्दीन शिराजी (रसु.) को सौंपे गए, जो तब से उनकी दरगाह की मिल्कियत और हिफाजत में हैं। ​ज्यारत (दर्शन): हर साल 12 रबीउल अव्वल (पैगंबर साहब के मिलाद के मुबारक मौके पर) और उर्स के दिनों में यहाँ देश-विदेश से आने वाले जायरीन के लिए पैगंबर साहब के बाल मुबारक के साथ-साथ इस मुबारक 'पेराहन' (लिबास) और 'ताज' की जियारत कराई जाती है। ​2. रूहानी सिलसिला (Sijra-e-Tariqat / Spiritual Lineage) ​सूफी परंपरा में 'सिजरा' उस आध्यात्मिक श्रृंखला (Chain of Succession) को कहते हैं जिसके जरिए रूहानी फैज (आध्यात्मिक ज्ञान और ऊर्जा) पैगंबर साहब से होते हुए औलिया-ए-किराम तक पहुंचता है। ख्वाजा जैनुद्दीन शिराजी का चिश्तिया सिलसिले का मुबारक़ सिजरा इस प्रकार है: ​अल्लाह के नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ​हजरत अली बिन अबी तालिब (करमल्लाह वज्हहू) ​हजरत ख्वाजा हसन बसरी (रह.) ​हजरत ख्वाजा अब्दुल वाहिद बिन जैद (रह.) ​हजरत ख्वाजा फजिल बिन अय्याद (रह.) ​हजरत ख्वाजा इब्न इब्राहिम अद्हम (रह.) ​हजरत ख्वाजा हुजैफा मरअशी (रह.) ​हजरत ख्वाजा अबू हुबैरह बसरी (रह.) ​हजरत ख्वाजा मुशाद الدين دينوري (रह.) ​हजरत ख्वाजा अबू अहमद अब्दाल (रह.) ​हजरत ख्वाजा अबू मुहम्मद चिश्ती (रह.) ​हजरत ख्वाजा अबू युसूफ चिश्ती (रह.) ​हजरत ख्वाजा मौदूद चिश्ती (रह.) ​हजरत ख्वाजा शरीफ जिन्दानी (रह.) ​हजरत ख्वाजा उस्मान हारूनी (रह.) ​हजरत ख्वाजा गरीब नवाज मोइनुद्दीन हसन चिश्ती (अजमेर शरीफ) ​हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (दिल्ली) ​हजरत फरीदुद्दीन गंजशकर (पाटन/अझोधन) ​हजरत निजामुद्दीन औलिया (महबूब-ए-इलाही, दिल्ली) ​हजरत बुरहानुद्दीन गरीब (दक्कन/खुल्लताबाद) ​हजरत ख्वाजा सैयद जैनुद्दीन शिराजी (खुल्लताबाद शरीफ) ​मुख्य बातें: ​औरंगजेब का मजार: इसी दरगाह परिसर के पश्चिमी हिस्से में मुगल बादशाह औरंगजेब की बेहद सादी और खुले आसमान के नीचे बनी कब्र है, जिसने अपनी जिंदगी में वसीयत की थी कि उसे इसी महान सूफी संत (हजरत जैनुद्दीन शिराजी) के कदमों के पास दफनाया जाए। ​यह स्थान इतिहास, अध्यात्म और इस्लाम के पवित्र अवशेषों का एक बहुत बड़ा केंद्र है, जो सदियों से आस्था का प्रतीक रहा है।