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Rag : Bageshree | विलंबित:कौन गत भई,दृत:ऋत बसंत की,एरी पी हरवा,बेग बेग आवो |कु.चिन्मय नाईक Chinmay

Pradeep Gurav

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Rag : Bageshree | विलंबित:कौन गत भई,दृत:ऋत बसंत की,एरी पी हरवा,बेग बेग आवो |कु.चिन्मय नाईक Chinmay

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Pradeep Gurav
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राग : बागेश्री बंदिश रचना : पारंपरिक 1) विलंबित एकताल : कौन गत भई.. 2)दृत त्रिताल : ऋत बसंत की.. 3)दृत त्रिताल : एरि पी हरवा घर आवो.. 4)दृत एकताल : बेग बेग आवो तुम रहसी जात.. गायक : गुरुवर्य श्री.प्रदीप गुरव यांचे शिष्य, कु. चिन्मय नाईक.. हार्मोनियम : श्री.प्रदीप गुरव तबला : श्री. शैलेश सावंत तानपुरा : कु.यशश्री सामंत,कु.लोकेशा भोईर..