पादुआ के संत अंतोनी का जीवन | Life Of St. Anthony Of Padua |
Lourd Mata Mandir
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पादुआ के संत अंतोनी का जीवन | Life Of St. Anthony Of Padua |
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Lourd Mata Mandir
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कलीसिया के कई सन्तो में कुछ महान संत ही ऐसे है जिनकी उपासना और श्रद्धा विश्वविख्यात है। पादुआ के संत अंतोनी भी उनमें से एक है जिन्हें संत पापा लियो तेरहवे ने सारे विश्व के संत का दर्जा दिया है। ऐसे महान संत का जन्म 15 अगस्त 1195 को पुर्तगाल के लिसबन नगर के एक कुलीन एवं संपन्न परिवार में हुआ था। बाल्यावस्था से ही संत अंतोनी प्रभु येसु की ओर आकर्षित हो गये थे। उनकी धार्मिकता को देखते हुए उनके माता पिता ने उन्हें धार्मिक संघ में भर्ती कर दिया। यहाँ उन्होंने आत्मसंयमी, एकांतवासी तथा सन्यासी जीवन स्वीकार कर लिया। पुरोहिताभिषेक होने के बाद वे भक्ति एवं प्रार्थना में जीवन बिताने के लियें एकांतवास में चले गये। धर्म प्रचार के लिए अफ्रिका जाते समय वे बिमार पड़ गये और उन्हें स्वदेश लौटना पडा लेकिन रास्ते में आंधी तुफान के कारण उनका जहाज रास्ता भटक गया और वे सिसली द्वीप के मेसीनिया तट पर पहँुच गये। उस समय इटली में फ्रंासीसी संघ के संस्थापक संत फ्रांसीस असीसी स्वयं एक धर्म सभा के संचालन में लगे थे। बिमारी की अवस्था में भी संत अंतोनी संत फ्रांसिस असीसी से मिलने चले गये और उनके साथ रहने की इच्छा प्रगट की। उनकी बिमारी के कारण अन्य मठाधिकारीयों ने आपत्ति प्रगट की लेकिन उन्हें रसोई मे कार्य की इजाजत दि गयी। अंतोनी अपने तपस्वी जीवन में चिंतन मनन और प्रार्थना में लिन स्वर्गीय सुख का आनंद लेते रहे। वे आत्मा और परमात्मा के घनिष्ठ संबंध का अनुभव करते रहे। धर्मशास्त्र के प्रति उनके ज्ञान को देखते हुए संत फ्रांसिस ने उन्हें ईश विज्ञान के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया। संत अंतोनी अब प्रवचन देने लगे। उनके प्रवचनों में एक प्रकार का खिंचाव था । लोग बरबस उनकी ओर खिंचे चलें जाते थे। धर्म शास्त्रों तथा धर्म विज्ञानों का ज्ञान पहले से ही उनमें था और साथ ही त्याग, तपस्या, भक्ति एवं प्रार्थना सब उनके व्यवहार में था अतः श्रोताओं पर उनकी बातों का बड़ा प्रभाव पडता था। एक बार संत अंतोनी का प्रवचन होने वाला था हजारों लोगो की भीड उमड पडी थी। एकाएक बादल गरजने लगे बिजली चमकने लगी। पानी और ओले पडने लगे। लोग इधर उधर भागने लगे। संत अंतोनी ने उन्हें भागने से रोका। जो लोग रूक गये उन्हें महसूस हुआ कि मानों उनके सिर पर एक बहुत बडा शामियाना तना हुआ है। उनके कपडे बिलकुल सूखे है। परंतु आस पास का क्षेत्र पानी से भिगा हुआ है। इस चमत्कार को देख अनेक लोगो का मन परिवर्तन हुआ। संत अंतोनी केवल वचनों से ही नही बल्की अपने कार्यो तथा व्यवहार द्वारा लोगो की सहायता करते थे। मिश्र देश की गलियों और समुद्र तट पर संत अंतोनी ने सुसमाचार की घोषणा की तथा लोगों ने उसकी वाणी सुनी। एक बार समुद्र तट पर कोई श्रोता नहीं थे, तब समुद्र की मछलियाँ एक जुट होकर उनका प्रवचन सुनती रहीं। खोई हुई वस्तुओं को पाने के लिए लोग संत अंतोनी की मध्यस्थता की प्रार्थना करते हैं। माता मरिया संत अन्तोनी को बहुत प्यार करती थी। एक बार संत अन्तोनी किसी घर में आराम कर रहे थे। उस घर के मालिक ने दरवाजे के सुराख से देखा तो ऐसा दृश्य दिखाई दिया मानो माता मरिया नन्हें बालक येसु को सन्त अन्तोनी के हाथों मंे दे रही है यही कारण है कि हम संत अन्तोनी की तस्वीर में बालक येसु को उनकी बाहों में देखते हैं। संत पापा पियुस बारहवें ने संत अन्तोनी को ‘वेदपारंगत’ घोषित किया। 13 जून 1231 को अपनी सांसारिक यात्रा समाप्त कर अपने भले कार्यो का पुरस्कार प्राप्त करने वे ईश्वर के राज्य पहुँच गये। उनकी अन्तेष्टि क्रिया के समय असाधारण भक्ति एवं श्रद्धा के प्रर्दशन हुए। पादुआवासी हमेशा से ही उनके अवशेषों एवं तरीकों को अपनी महानतम निधि मानते आए है। आईये ऐसे महान संत से विशेष कृपा प्राप्त करने हेतु हम प्रार्थना करे। हे संत अंतोनी, मैं सारे हृदय से तुझे प्रणाम करता हूँ। तु अलौकिक कृपायुक्त स्त्रोत है। प्रभु येसु तेरे साथ है। तू दैवी पिता संत फ्रांसीस का पवित्र, नम्र, विनीत और प्रशंसनीय पुत्र है। स्मरण कर, हे चमत्कारी संत स्मरण कर, कि जो भी आवश्यकता में तुझे पुकारता है उन्हें तू सहायता का आश्वासन देने से कभी इन्कार नहीं करता है। तेरे अनुपम विश्वास से मुझे उत्तेजित कर कि मैं व्यर्थ बातों मे विश्वास न करूँ। मैं तुझे पुकारता हूँ, तू कृपा का धनी और बालक येसू का प्रिय मित्र है। हे संत अंतोनी दीनों और चमत्कारों के संत मुझे तेरी मदद और अनुग्रह की आवश्यकता है। याद कर, हे महान संत अंतोनी, कि तेरी कृपा से, मरण गलतियाँ विपत्तियाँ, शैतान और हर प्रकार के रोग दूर हो जाते है। तेरी ही सहायता से बिमार चंगे हो जाते है, समुद्र पर शांति आ जाती है, कैदी मुक्त हो जाते है, लंगडे-लुले चलते है, अंधे को दृष्टि मिलती है और खोई वस्तुएँ प्राप्त हो जाती है। तू सब की पुकार सुनता है और सब की मांगे पुरी करता है। आशा पूर्वक मै तेरी शरण में आता हूँ, हे महान संत अंतोनी, मेरी प्रार्थना सुन ले और मेरी मांगे पूरी कर, आमेन।
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