सुलोचना को नागराज शेषनाग का श्राप ||
DharmikKahaniyan
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सुलोचना को नागराज शेषनाग का श्राप ||
सुलोचना को नागराज शेषनाग का श्राप
एक बार माता लक्ष्मी
ने शेषनाग को श्री हरि
विष्णु के हाथ पर बांध
दिया उन्होंने शेषनाग को
कसकर श्री हरि की कलाई
पर बांध दिया जिससे उनके
नेत्र से दो अश्रु निकल गए
और उन दो आंसू की बूंदों से
दो सुंदर कन्याएं उत्पन्न हुई।
उनमें पहली कन्या का नाम
सुनयना और दूसरी कन्या का
नाम सुलोचना रखा गया।
सुनयना का विवाह मिथिला
राज्य के राजा जनक से किया
गया। सुलोचना का विवाह देवराज
इन्द्र के पुत्र जयंत से निश्चित हुआ।
किन्तु जब सुलोचना को पता चला
कि असुरों के सम्राट रावण के
पुत्र मेघनाद ने इन्द्र और उनके
पुत्र जयंत को हरा दिया है
तो सुलोचना को मन ही मन
मेघनाद से प्रेम हो गया और
मेघनाद भी सुलोचना के सौंदर्य
पर मुग्ध हो गया और दोनों ने
विवाह कर लिया। जब नागराज
शेषनाग को ये बात पता चली तो
उन्होंने सुलोचना को क्रोधित होकर
ये श्राप दिया कि "तुमने जिस
अधर्मी को अपना पति चुना है
उसका वध त्रेतायुग में मेरे ही
हाथों होगा"। इसी श्राप के कारण
मेघनाद का वध शेषनाग ने
लक्ष्मण का रूप धरकर किया।
• विष्णु ने शिव को मुश्किल से बाहर निकाला।। ...