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“राधा स्वामी धरा नर रूप”🌷🙏🌷🙏🌷#radhasoami #dayalbagh

Dayalbagh (samrath purush) 🙏

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“राधा स्वामी धरा नर रूप”🌷🙏🌷🙏🌷#radhasoami #dayalbagh

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Dayalbagh (samrath purush) 🙏
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राधा स्वामी धरा नर रूप ॥ राधा स्वामी दयाल परम पुरुष पूर्ण धनी, परम गुरु हुजूर प्रोफेसर प्रेम सरण सत्संगी साहब के पावन प्रकट दिवस पर समर्पित यह भावपूर्ण शब्द गुरु प्रेम, सत्संग, श्रद्धा और पूर्ण समर्पण की अमृतमयी अनुभूति कराता है। इस शब्द में सतगुरु के नर रूप में प्रकट होकर समस्त जीवों के उद्धार हेतु किए गए दिव्य उपकार का वर्णन है। सत्संग के सार रस, गुरु चरणों की प्रीति, प्रेम भक्ति, दृढ़ विश्वास और गुरु कृपा की महिमा को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है। “गुरु बिन कल नहीं पड़त घड़ी”, “अलख शब्द और अगम शब्द”, तथा “पूरा घर पूरी गति पाए” जैसे भाव आत्मा को भीतर तक स्पर्श करते हैं और साधक को गुरु चरणों में स्थिर होने की प्रेरणा देते हैं। अंत में अत्यंत दीनता एवं विनम्रता से सतगुरु चरणों में प्रार्थना की गई है कि दया और मेहर का हाथ सदा बना रहे तथा हमें अपने चरणों में स्थान प्रदान करें। राधा स्वामी। #radhasoami #dayalbagh #dayalbaghsatsang 🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏🌷🙏 राधा स्वा आ मी राधा स्वा आ मी राधा स्वा आ स मी राधा स्वा आ मी आज का दिन अत्यंत हर्ष और उल्लास का है आज ही के पावन दिन 18 मई 2003 को हुजूर राधा स्वमी दयाल परम पुरुष पूर धनी परम गुरु हुजूर प्रोफेसर प्रेम सरण सत्संगी साहब के स्वरूप में प्रकट हुए और समस्त सृष्टि के उद्धार के वचन को साकार किया राम राधा स्वमी धन रूप जगत में गुरु होए जीवताए गुरु होए गुरु होए जीवता राधा स्वामी धरा नर रूप जगत में राधा स्वामी धरा नर रूप जगत में राधा स्वामी धरा नर रूप जगत में गुरु होए जीव चिता गुरु होए जीव चिताए जिन जिन माना वचन समझ के तिन को संग गाए जिन जिन माना वचन समझ के तिन को संग गाए कर सत्संग सार रस पाया कर सत्संग सार रस पाया पीपी तृप्त अए पीपी तृप्त अए दृढ़ विश्वास प्रेम शरण में राखो प्रेम भक्ति उन्हीं के चरणों में धारो उन्हीं को सच्चा हितकारी मानो गुरु संग प्रीति करे उन जस चकोर चंदा। गुरु बिन कल नहीं पड़त घड़ी एक गुरु बिन कल नहीं पड़त घड़ी दम दम मन कुलाए दम दम मन को लाए जब गुरु दर्शन मिले भाग से मगन होत जस बछड़ा गाए ऐसी प्रीति लगी जिन गुरु मुख ऐसी प्रीति लगी जिन गुरु गुरु मुख सो गुरु अपनाए सो गुरु अपनाए तन के लगन भोग इंद्री के छिन में सब बिसराए गुरु की मूरत बसीए में गुरु की मूरत बसीए में आठ पहर गुरु संग रहा आठ पहर गुरु संग रहा अलख शब्द और अगम शब्द ले निज पद राधा स्वमी आए पूरा घर पूरी गति पाए पूरा घर पूरी गति पाएअब कुछ आगे कहा ना जाए अब कुछ आगे कहा ना जाए आज हम समस्त भूलनहार बाल वक्त गुरु परम पुरुष हुजूर प्रोफेसर प्रेम सरण सत्संगी साहब के चरणों में कोटि-कोटि दंडवत नमन करते हुए अति दीनता पूर्वक प्रार्थना करते हैं कि हे दयाल आपकी दया व मेहर का हाथ इसी स्वरूप में अब कुछ आगे कहा ना जाए अब कुछ आगे कहा ना जाए आज हम समस्त भूलनहार बाल वक्त गुरु परम पुरुष हुजूर प्रोफेसर प्रेम सरण सत्संगी साहब के चरणों में कोटि-कोटि दंडवत नमन करते हुए अति दीनता पूर्वक प्रार्थना करते हैं कि हे दयाल आपकी दया व मेहर का हाथ इसी स्वरूप में सदा यूं ही बना रहे हमको दया के काबिल बना अपने चरणों में लगा लीजिए हे सतगुरु अब दया बिचारो क्या मुख ले मैं करूं पुकारी नहीं प्रतीति प्रीति नहीं रंचक तुम सतगुरु मोहे लेव सुधारी हार हार अब शरण पारी हार हार अब प्रेम की शरण पारी राधा स्वामी राधा स्वामी