राम नाम से तैरे पत्थर! रामेश्वरम की स्थापना, समुद्र पार सेना और रावण का भय रावण मंदोदरी संवाद #Ram
Satat Bhagwat Chintan
0:00 / 0:00
राम नाम से तैरे पत्थर! रामेश्वरम की स्थापना, समुद्र पार सेना और रावण का भय रावण मंदोदरी संवाद #Ram
618 просмотров · Трансляция закончилась 6 дн. назад
Satat Bhagwat Chintan
386 подписчиков
618 просмотров · Трансляция закончилась 6 дн. назад
जय श्री राम! 🙏 कल्याणकारी महादेव की जय! 🌸
आज के इस लाइव सत्संग में हम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के लंकाकांड के अत्यंत दिव्य और प्रतापी प्रसंग का श्रवण करेंगे। इस कथा में हम जानेंगे कि कैसे श्रद्धा, भक्ति और प्रभु की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है।
इस कथा के मुख्य आकर्षण और प्रसंग:
रामसेतु का निर्माण और पत्थरों का तैरना: समुद्र देव के बताए अनुसार वानर सेना बड़े-बड़े पर्वत और वृक्ष लेकर आती है। नल और नील अपने हाथों से स्पर्श कर उन्हें समुद्र में स्थापित करते हैं। जो पत्थर स्वयं डूबता है और दूसरों को भी डुबो देता है, वह प्रभु राम की कृपा और नाम के प्रताप से जल पर तैरने लगता है! भगवान इस अद्भुत सेतु को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
श्री रामेश्वरम महादेव की स्थापना: सेतु पार करने से पहले भगवान श्री राम शिवजी की स्थापना की इच्छा व्यक्त करते हैं— "करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना॥" प्रभु शिव और राम की अनन्यता को प्रकट करते हुए कहते हैं— "शिवद्रोही मम भगत कहावा। सो नर सपनेहुँ मोहि न भावा॥" अर्थात जो शिव से द्रोह कर मेरी भक्ति चाहता है, वह मुझे स्वप्न में भी प्रिय नहीं है। भगवान रामेश्वरम की महिमा बताते हैं कि जो यहाँ दर्शन करेगा और गंगाजल चढ़ाएगा, वह सायुज मुक्ति पाएगा।
सागर पार सेना का प्रस्थान और जीव-जंतुओं का आनंद: पूरा राम-दल सुखपूर्वक सेतु पार करता है। सागर के जीव-जंतु भी बैर-भाव भूलकर प्रभु के दर्शन के लिए आ जाते हैं।
सुवेल पर्वत पर डेरा और लंका में खलबली: सेना सुवेल पर्वत पर डेरा डालती है। वानर-भालू लंका की सीमा पर राक्षसों को दण्डित करते हैं। जब नाक-कान कटे हुए राक्षस लंका पहुँचते हैं, तो रावण भयभीत हो जाता है।
रावण का भय और मंदोदरी की सीख: भयवश रावण अपने दसों मुख से एक साथ समुद्र के दस नाम लेता है (श्राप के अनुसार दसों मुख से एक साथ बोलना उसके अंत का सूचक था)। महल में मंदोदरी उसे समझाती है कि श्रीराम सूर्य के समान हैं और तुम जुगनू समान हो, उनसे बैर छोड़ दो। पर अभिमानी रावण नहीं मानता और अपनी सभा में मंत्रियों से पूछता है, जहाँ उसके चाटुकार मंत्री कहते हैं कि यह तो केवल तुच्छ मनुष्य और वानर सेना है!
कथा की मुख्य चौपाइयाँ:
✨ "करिहउँ इहाँ संभु थापना। मोरे हृदयँ परम कलपना॥"
✨ "सिव द्रोही मम दास कहावा। सो नर करप कलप भरि घोर नरक महुँ पावा॥"
✨ "जे रामेस्वर दरसन करिहहिं। ते तनु तजि मम लोक सिधरिहहिं॥"
✨ "बार बार प्रभु पूछहिं कतहीं। कहु कस कटक भालु कपि जतहीं॥"
आइए, इस ज्ञान और भक्ति रस से परिपूर्ण कथा का श्रवण करें और प्रभु श्रीराम व महादेव की अपार कृपा प्राप्त करें।
📌 वीडियो को लाइक करें, अपने प्रियजनों के साथ साझा (Share) करें और चैनल को सब्सक्राइब करके इस धर्म-यात्रा का हिस्सा बनें।
📌 #RamsetuConstruction #RameshwaramEstablishment #LankaKand #RavanaTenNames #PanditOmPrakashTiwari #SriRamcharitmanas #Ramayan
#LankaKand #Ramsetu #Rameshwaram #LordShiva #LordRam #Mahadev #RameshwaramEstablishment #Sunderkand #Hanumanji #SubelParvat #RavanaMandodari #BhaktiSagar #ShriRamCharitManas #PanditOmPrakashTiwari #SatsangLive #SanatanDharma #IndianEpics