Maa Mangla Gouri vrat katha#maamaglagouri
@Bhaktimarg
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मंगला गौरी व्रत सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार को रखा जाता है। यह व्रत माता पार्वती के स्वरूप माँ मंगला गौरी को समर्पित है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए इसे करती हैं।
मुख्य बिंदु
पूजित देवी: माँ मंगला गौरी (माता पार्वती का सौम्य रूप)
दिन: सावन माह के सभी मंगलवार
उद्देश्य: अखंड सौभाग्य, वैवाहिक सुख, और सुयोग्य वर की प्राप्ति
सामग्री: 16 की संख्या का विशेष महत्व (16 श्रृंगार की वस्तुएं, 16 हरी बत्तियां, 16 की संख्या में फल-फूल और प्रसाद)
पूजन विधि
संकल्प: प्रातःकाल स्नान के बाद साफ कपड़े (लाल या हरे रंग के) पहनकर व्रत का संकल्प लें।
स्थापना: पूजा स्थान पर चौकी लगाकर लाल कपड़ा बिछाएं और माँ मंगला गौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
पूजा: देवी को 16 श्रृंगार सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी आदि), फल, फूल, और नैवेद्य अर्पित करें।
कथा व आरती: मंगला गौरी व्रत कथा पढ़ेंसुनें और 16 बत्तियों वाले दीपक से आरती करें।
पारणा: दिनभर व्रत रखकर शाम को आरती के बाद एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करें।
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